अमरनाथ की यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी amarnath ki yatra ke bare mein samporn jankari

अमरनाथ गुफा और अमरनाथ की यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी

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1 अमरनाथ गुफा और अमरनाथ की यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी
1.1 अमरनाथ में स्थित प्राकृतिक स्वयंभू हिमानी शिवलिंग और गुफा

अमरनाथ की यात्रा संपूर्ण भारत में हिंदुओं की सबसे पवित्र तीर्थ यात्रा मानी जाती है। अमरनाथ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर जो शिवलिंग का निर्माण होता है वह स्वयंभू बर्फ से होता है। इस शिवलिंग को हिमानी शिवलिंग भी कहा जाता है। बर्फ की बूंदों के द्वारा बर्फ निर्मित होती है जो कि स्वयं से लिंग के आकार में पूरी तरह जम जाती है।और कुछ महीने तक इसी अवस्था में घटती बढ़ती रहती है 2 महीनों के पश्चात शिवलिंग अपने आप समाप्त हो जाता है।

अमरनाथ की कई रोचक कहानियां यहां पर पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। भारत के सबसे पुरानी गुफा में से एक अमरनाथ की गुफा अपने आप में कई प्रकार की ऐतिहासिक,सांस्कृतिक, प्राचीन कहानियों को समेटे हुए हैं। तो आइए जानते हैं अमरनाथ की यात्रा के बारे में संपूर्ण जानकारी

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अमरनाथ में स्थित प्राकृतिक स्वयंभू हिमानी शिवलिंग और गुफा

अमरनाथ गुफा समुद्र तल 13600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।अमरनाथ गुफा जम्मू कश्मीर राज्य के श्रीनगर से लगभग 138 किलोमीटर की दूरी पर है। जम्मू कश्मीर राज्य के पहलगाम और अनंतनाग जिले में स्थित अमरनाथ भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस प्राकृतिक स्थान की विशेषता यह है कि यहां पर बर्फ से शिवलिंग का निर्माण स्वत होता है।

यहां पर सावन के महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान अमरनाथ के दर्शनों के लिए आते हैं। सावन पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु शिवलिंग के संपूर्ण रूप के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर विराजमान शिवलिंग को स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहा जाता है। इस स्थान के बारे में माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां पर भगवान शिव ने अपनी पत्नी देवी पार्वती को अमरत्व का ज्ञान प्राप्त कराया था।

यहां पर स्थित गुफा में कई जगह से बर्फ की छोटी-छोटी बूंदे टपकती रहती हैं जो भूमि पर गिर कर मुलायम बर्फ के रूप में जम जाती हैं। परंतु एक जगह ऐसी है जहां पर यह बारिश की बूंदे ठोस बर्फ के रूप में जमती हैं जिसे हिमानी शिवलिंग कहा जाता है। अमरनाथ में आकार में 10 फुट लंबा शिवलिंग का निर्माण हो जाता है।सावन के महीने में अमरनाथ के दर्शनों के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश विदेश से अमरनाथ की यात्रा करते हैं।

ऐसा माना जाता है कि अमरनाथ की दर्शनों के पश्चात मनुष्य सभी प्रकार केपापों से सदा सदा के लिए मुक्त हो जाता है। दोस्तों अगर आप धार्मिक पर्यटन केंद्रों के साथ-साथ रोमांचक पहाड़ी गतिविधियों का आनंद लेना चाहते हैं तो आपको एक बार अमरनाथ की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।

अमरनाथ गुफा के बारे में प्रचलित कथाएं

अमरनाथ गुफा के बारे में प्रचलित कथाओं में एक कथा यह है कि यह वही स्थान है जहां पर भगवान शिव ने अपनी धर्मपत्नी माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी। और अमर कथा को सुनकर यहां पर स्थित एक कबूतर के जोड़े को अमरता प्राप्त हो गई। यह कबूतर के जोड़े आज भी इस गुफा में विराजमान है।कबूतर के जोड़ों को जो भी भक्त देख लेते हैं उन्हें भगवान शिव और पार्वती साक्षात रूप में दर्शन देकर उन्हें इस मनुष्य योनि से मुक्त कर देते हैं। इसके साथ-साथ इस अमर कथा को सुनकर शुक्र से भी अमर हो गए थे।

इस कथा के जनश्रुति यह मानी जाती है कि यहां पर भगवान शिव ने माता पार्वती को इस स्थान पर आने वाले भक्तों के लिए उनके मार्ग में पड़ने वाले प्रसिद्ध प्राचीन और पवित्र स्थलों के बारे में भी जानकारी दी थी। और उन सब स्थानों की महत्वता के बारे में भी बताया। तब से अमरनाथ गुफा की यात्रा भारत में हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से सबसे पवित्र तीर्थ यात्रा मानी जाती है।

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अमरनाथ गुफा की यात्रा मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख धार्मिक स्थान

अनंतनाग

अनंतनाग स्थान के बारे में रोचक कथा यह है कि भगवान शिव जब अपनी पत्नी पार्वती को अमर अमर कथा सुनाने के लिए अमरनाथ गुफा में ले जा रहे थे तो रास्ते में उन्होंने सभी छोटे-बड़े सर्पों को अनंतनाग नामक स्थान पर छोड़ दिया था।

चंदनबाड़ी

इस स्थान पर भगवान शिव ने अपने माथे के चंदन को उतारा था। यहां पर भगवान से मैं अपने माथे पर चंदन को उतार कर अमर कथा  सुनाने के लिए देवी पार्वती को लेकर आगे बढ़ गए।

पिस्सू टॉप

इस स्थान पर भगवान शिव ने सभी छोटे बड़े कीड़े मकोड़ों पिस्सुओं को छोड़ दिया था।

शेषनाग

शेषनाग नामक स्थान पर भगवान शिव ने अपने गले में स्थित भगवान शेषनाग को इस स्थान पर छोड़ा था। वर्तमान में इस स्थान पर एक झील है इसी झील में यह माना जाता है कि भगवान शेषनाग हैं।

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अमरनाथ गुफा

अमरनाथ गुफा वही गुफा है जहां पर भगवान शिव ने देवी पार्वती जी को अमरत्व का ज्ञान प्रदान किया। यह गुफा 11 मीटर ऊंची 19 मीटर गहरी और 16 मीटर चौड़ी है। इस गुफा की छत से बर्फ का पानी बूंदों के रूप में टपकता रहता है। इन्हीं बर्फ के पानी की बूंदों से इस गुफा में हिमानी शिवलिंग, श्री गणेश,माता पार्वती, और कार्तिकेय की बर्फ से बनी हुई आकृतियां उभर जाती हैं। अमरनाथ गुफा भारत की सबसे प्राचीनतम गुफाओं में से एक है। हिंदू धर्म के मानने वाले अमरनाथ गुफा को सबसे पवित्र स्थान भी मानते हैं। अमरनाथ यात्रा का अंतिम पड़ाव अमरनाथ गुफा ही है।

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अमरनाथ गुफा एवं अमरनाथ यात्रा की ऑफिशियल वेबसाइट क्या है?

shriamarnathjishrine.com

अमरनाथ यात्रा की कुल दूरी कितनी है?

अमरनाथ की यात्रा की कुल दूरी पहलगाम से 36 किलोमीटर की है। जबकि दूसरे छोर बालटाल से अमरनाथ की कुल दूरी मात्र 14 किलोमीटर की होती है। परंतु बालटाल की यात्रा अत्यंत दुर्गम होती है।

अमरनाथ गुफा के आसपास का मौसम कैसा है?

अमरनाथ की मौसम की बात की जाए तो यहां का मौसम जनजीवन के लिए अत्यंत दुर्गम और कठिन होता है। अमरनाथ की यात्रा वर्ष में केवल एक महीने के लिए ही सुचारू रूप से चलती है। चारों तरफ से घिरी हुई ऊंची ऊंची चोटियां, दर्रे, झील सभी बर्फ से ढके रहते हैं।

अमरनाथ गुफा में शिवलिंग किस चीज का बना हुआ है?

अमरनाथ गुफा में स्थित शिवलिंग गुफा की ऊपरी छत से टपकते हुए बर्फ की बूंदों से निर्मित होता है। ठोस बर्फ से निर्मित यह शिवलिंग लगभग 10 फुट तक ऊंचा हो जाता है।श्रावण मास में चंद्रमा के बढ़ते और घटते क्रम के अनुसार शिवलिंग का आकार घटता और बढ़ता रहता है।

अमरनाथ यात्रा किस समय प्रारंभ होती है?

अमरनाथ यात्रा आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर पूरे सावन भर चलती रहती है।

अमरनाथ यात्रा की बुकिंग कैसे की जाती है?

अमरनाथ यात्रा की बुकिंग अमरनाथ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर की जा सकती है।आधिकारिक वेबसाइट के बारे में आपको ऊपर जानकारी दी जा चुकी है।

अमरनाथ गुफा किस राज्य में स्थित है?

अमरनाथ गुफा जम्मू कश्मीर राज्य के पहलगाम और अनंतनाग जिले में स्थित है।

अमरनाथ गुफा की खोज किसने की?

अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार अमरनाथ गुफा की खोज सन् 1850 में बूटा मलिक नामक मुस्लिम गडरिया ने की थी। इसी वजह से अमरनाथ गुफा में चढ़ने वाले चढ़ावे का एक तिहाई प्रतिशत चढ़ावा बूटा मलिक के वंशजों को दिया जाता था। परंतु श्राइन बोर्ड की स्थापना के बाद अब चढ़ावे का हिस्सा नहीं दिया जाता है।

एक अन्य तथ्य के अनुसार इस गुफा की खोज महर्षि भृगु ने की थी। परंतु इस बात का अभी तक कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।

अमरनाथ यात्रा कितने दिन के लिए होती है?

अमरनाथ यात्रा पर अगर आप जाना चाहते हैं तो हम आपको जानकारी देने की अमरनाथ यात्रा कुल 46 दिनों की होती है।

अमरनाथ कैसे पहुंचे?

जम्मू कश्मीर से अमरनाथ पहुंचने के दो मार्ग हैं पहला पहलगाम होते हुए अमरनाथ पहुंचना और दूसरा बालटाल घाटी से अमरनाथ पहुंचना।

पहलगाम से अमरनाथ कैसे पहुंचे?

पहलगाम जम्मू से 320 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहलगाम को एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी माना जाता है।पहलगाम की खूबसूरती दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। आप जम्मू से 320 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए जम्मू कश्मीर राज्य परिवहन की नियमित बसों का उपयोग कर सकते हैं।पहलगाम से अमरनाथ यात्रा का प्रारंभ होता है। यहां पर कई संस्थाओं के द्वारा विशेष लंगर की व्यवस्था की जाती है।

बालटाल से अमरनाथ कैसे पहुंचे?

बालटाल घाटी से अमरनाथ की यात्रा करना अधिक सुरक्षित नहीं होता है। जम्मू से बालटाल की दूरी 400 किलोमीटर की है। जम्मू से उधमपुर के रास्ते में बालटाल घाटी पढ़ती है जम्मू और उधमपुर से नियमित व से बालटाल घाटी आपको पहुंचा सकती हैं। एडवेंचर और पहाड़ों पर खतरनाक गतिविधियों के शौकीन लोग इस रास्ते का चुनाव करते हैं। आप अमरनाथ यात्रा यहां से 1 दिन में पूरी करके लौट सकते हैं।

ट्रेन के माध्यम से अमरनाथ कैसे पहुंचे?

ट्रेन के माध्यम से अगर आप अमरनाथ की यात्रा के लिए पहुंचना चाहते हैं तो यहां पर दो रेलवे स्टेशन पहलगाम के लिए सुविधाजनक रहते हैं। उधमपुर और जम्मू तवी रेलवे स्टेशन।इंदौर रेलवे स्टेशनों पर आप पहुंचकर प्राइवेट टैक्सी या कैप के माध्यम से पहलगाम पहुंचकर अमरनाथ की यात्रा प्रारंभ कर सकते हैं।

बस के द्वारा अमरनाथ कैसे पहुंचे?

सड़क परिवहन से अगर आप अमरनाथ जाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको श्रीनगर पहुंचना होगा श्रीनगर से पहलगाम की दूरी 94 किलोमीटर की है।श्रीनगर से पहलगाम के लिए नियमित बसें जम्मू कश्मीर राज्य परिवहन सड़क निगम के द्वारा चलाई जाती हैं।

हवाई जहाज के माध्यम से अमरनाथ कैसे पहुंचे?

हवाई जहाज के माध्यम से अमरनाथ पहुंचना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको श्रीनगर एयरपोर्ट आना पड़ेगा।श्रीनगर एयरपोर्ट के लिए भारत के साथ-साथ विदेश से भी कई फ्लाइट उपलब्ध है। श्रीनगर से पहलगाम की दूरी 90 किलोमीटर की है एयरपोर्ट के बाहर से आप प्राइवेट कैब या बस के माध्यम से पहलगाम आसानी से पहुंच सकते हैं।

अमरनाथ यात्रा का अनुमानित खर्च कितना है?

दोस्तों अगर आप अगर आप अमरनाथ यात्रा करना चाहते हैं तो जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से पहलगाम तक आना पड़ेगा पहलगाम से आप की पैदल यात्रा शुरू होती है। जम्मू से कुल खर्च की बात की जाए तो आप अनुमानित तौर पर ₹5000 प्रति व्यक्ति से ₹10000 तक में संपूर्ण अमरनाथ यात्रा कर सकते हैं।

अमरनाथ गुफा की फोटो गैलरी

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नई दिल्ली से अमरनाथ की दूरी

971 किलोमीटर

मुंबई से अमरनाथ की दूरी

1717 किलोमीटर

कोलकाता से अमरनाथ की दूरी कितनी है?

2450 किलोमीटर

चेन्नई से अमरनाथ की दूरी कितनी है?

2398 किलोमीटर

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