छतरपुर में घूमने लायक सबसे अच्छी जगहें

  • महाराजा छत्रसाल संग्रहालय(maharaja chatrasal sangrahalaya) 
  • खजुराहो के मंदिर(khajuraho ke Mandir)
  • छतरपुर गंगा बांध(chatarpur gangau bandh)
  • छतरपुर में प्रसिद्ध भीमकुंड(chatarpur famauos bheemkund)
  • रनेह जलप्रपात(raneh waterfall)
  • मुंबई देवी मंदिर(Mumbai Devi mandir)
  • पांडव गुफाएं एवं जलप्रपात(pandavas caves and waterfall)
  • पन्ना राष्ट्रीय उद्यान(panna national park) 
  • महामति प्राणनाथ जी मंदिर(mahamati prannath ji temple) 
  • केन घड़ियाल अभ्यारण(Ken ghariyal abhyarahan) 
  • बलदेव जी मंदिर(baldev ji mandir)
  • बेनी सागर बांध(beni Sagar bandh)
  • गुलगंज किला(gulganj qila)
  • छतरपुर के आकर्षक तालाब(chatarpur ke talab) 

छतरपुर मध्य प्रदेश राज्य का एक अति सुंदर पर्यटन स्थल है। यह सुंदर इमारतों, भौगोलिक खजानो और वन्यजीवों के लिए अत्यंत संरक्षित स्थान है। यहां पर अनेक धार्मिक आकर्षण हैं जो पर्यटकों को लुभाते हैं। यहां पर दो नदियों खुदार और किन का संगम स्थल है छतरपुर में ही विश्व प्रसिद्ध यूनेस्को की धरोहर स्थल खजुराहो मंदिर है।

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1 महाराजा छत्रसाल संग्रहालय(maharaja chatrasal sangrahalaya)

यह क्षेत्र यह क्षेत्र चारों ओर से नदियों, पहाड़ों और तालाबों से घिरा हुआ है। यहां पर पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं हैं। यहां का इतिहास बुंदेल राजाओं और मुगलों से संबंधित रहा है। इस राज्य की स्थापना बुंदेल राजा छत्रसाल जी ने की थी। छत्रसाल जो ऐसे शासक थे, जिन को कहा जाता है कि इन्होने मुगलों को उन्होंने हरा कर इस राज्य की स्थापना की थी।

छतरपुर जिले की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 600 फीट की है। यहां पर चंदेल द्वारा किए गए निर्माण में तालाब और किले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां के प्रमुख उद्योगों में हस्तशिल्प कला तांबे के बर्तन और साबुन का निर्माण होता है। इसके अलावा कुछ प्रमुख घूमने वाली जगह के बारे में आइए दोस्तों जानते हैं।

 महाराजा छत्रसाल संग्रहालय(maharaja chatrasal sangrahalaya)

बुंदेल राजाओं के स्मारक यहां पर रखे हुए हैं। इस संग्रहालय को पुराने किले में ही बनाया गया है। यह किला देखने में अत्यंत आकर्षक है। इस समय संग्रहालय में 8 गलियां बनी हुई है। इन राज्यों से संबंधित वस्त्र उनके हथियारों उनसे संबंधित चीजों के स्मारक रखे हुए हैं।

इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि इस संग्रहालय में जैन धर्म से संबंधित प्राचीन चीजें भी संग्रहित कर के रखी गई हैं। छतरपुर आने वाले पर्यटक को में यहां आने की संख्या सबसे ज्यादा होती है।

खजुराहो के मंदिर (Khajuraho ke Mandir)

खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश के छतरपुर क्षेत्र में अपने विश्व प्रसिद्ध मध्य काली मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो क्षेत्र का प्राचीन नाम खजूर पूरा था। यहां पर खजूरों की मात्रा बहुतायत होती है। खजुराहो में बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिंदू और जैन के मंदिर हैं।

यहां पर्यटक देश विदेश से आकर इन प्राचीन मंदिरों को देखते हैं। इन मंदिरों को प्राचीन होने के बाद भी इनकी खूबसूरती अत्यंत सुंदर है। पर्यटकों को हिंदू कला और संस्कृति को अगर देखना है तो एक बार खजुराहो के मंदिरों पर जाकर इनकी अनूठी शिल्पकार को जरुर देखना चाहिए। खजुराहो के मंदिर की सबसे खास बात इनकी काम क्रियाओं में व्यस्त मंदिरों में बेहद मूर्तियों को खूबसूरती से उतारा गया है।

विश्व यूनेस्को ने खजुराहो को धरोहर स्थल में शामिल किया है। यह माना जाता है कि खजुराहो में लगभग कुल मिलाकर 100 मंदिर थे जो वर्तमान में लगभग केवल 25 तक बचे हैं कि अत्यंत प्राचीन होने के कारण बाकी मंदिर जीण हो गए हैं या समाप्त हो चुके हैं। खजुराहो के मंदिर में कंदरिया महादेव सबसे प्रमुख मंदिरों में है जो आज भी अत्यंत बड़ा और सुंदर देखने में लगता है।

खजुराहो की गाइड सेवाएं(guide service)

खजुराहो मंदिर घूमने के लिए खजुराहो के प्रशासन द्वारा यहां पर गाइड व्यवस्था भी की गई है जो यहां पर पर्यटकों को घुमाकर उस स्थान का महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। वैसे अगर आप पहली बार खजुराहो जा रहे हैं तो आपको एक बार गाइड जरूर लेना चाहिए। गाइड की कीमत केवल ₹200 से लेकर ₹500 तक ही होती है।

खजुराहो कैसे घूमे?(how to travel khajuraho) 

खजुराहो लगभग 10 किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर पूरा भ्रमण करने के लिए सबसे अच्छा माध्यम साइकिल को माना जाता है। यह साइकिल यहां के प्रशासन द्वारा मात्र ₹20 प्रति घंटे की दर से पश्चिमी समूह के स्टैंड से पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं।

इन साइकिल ऊपर साइकिलिंग करके पर्यटक खजुराहो को विभिन्न मंदिरों जैन मंदिर को करीब से देख सकते हैं।

खजुराहो कैसे पहुंचे!(how to reach khajuraho)

वायु मार्ग से खजुराहो आने के लिए खजुराहो एयरपोर्ट जो है। शहर से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है। खजुराहो एयरपोर्ट दिल्ली बनारस आगरा आदि एयरपोर्ट से जुड़ा हुआ है

रेल मार्ग से खजुराहो आने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन खजुराहो रेलवे स्टेशन है जो दिल्ली आगरा जयपुर, भोपाल उज्जैन के लिए रेल सेवा उपलब्ध कराता है। दिल्ली और मुंबई से आने वाले पर्यटकों के लिए झांसी भी एक सुविधाजनक रेलवे स्टेशन है।

खजुराहो सड़क मार्ग से आने के लिए भी अत्यंत सरल साधन है। क्योंकि यह राष्ट्रीय राजमार्ग 2, राष्ट्रीय राजमार्ग 3 और राष्ट्रीय में 75 से जुड़ा हुआ है। इन सभी राष्ट्रीय राजमार्गों से आप खजुराहो आसानी से पहुंच सकते हैं।

छतरपुर गंगऊ बांध(chatarpur gangau bandh)

छतरपुर के बेस्ट पिकनिक स्पॉट्स में से एक गंगा बांध पाठकों के लिए खासा लोकप्रिय है। गंगा बांध खजुराहो पर्यटन स्थल के समीप स्थित है। यह केन और सिमरी नदी के संगम स्थल पर बनाया हुआ बेहद खूबसूरत बांध है यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

छतरपुर जिले से इसकी दूरी लगभग 19 किलोमीटर है। इस बांध में पर्यटकों के लिए बेहतरीन नौका बिहार की भी सुविधा दी गई है जिसका पर्यटक यहां कर आनंद उठाते हैं।

रनेह जलप्रपात(raneh jalprapat)

खजुराहो पर्यटन स्थल से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित या प्रपात छतरपुर जिले का सबसे खूबसूरत जलप्रपात में से एक है। खुदार और केन नदी के संगम से बनाया प्रपात देखने में अत्यंत खूबसूरत है।

जलप्रपात का सबसे आकर्षक बात यह है कि यह लगभग 4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और आसपास के क्षेत्र में कई छोटे-बड़े जलप्रपात इसमें आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पर्यटकों के लिए यहां देखने के लिए बहुत ही खूबसूरत नज़ारा भी मिलता है।

देश-विदेश से पर्यटक इस जलप्रपात को देखने के लिए आते हैं। यहां का जो सबसे प्रमुख जलप्रपात है वह लगभग 100 फीट गहरा है और जब यह पानी गिरता है तो रंग बिरंगी ग्रेनाइट चट्टानों से होकर गुजरता है जो कि एक कलरफुल व्यू भी बनाता है।

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छतरपुर भीमकुंड(chatarpur bheemkund) 

छतरपुर के बजना गांव में स्थित या एक आकर्षक स्थान है। जो कि छतरपुर के मुख्य जिले से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसे भीमकुंड के नाम से जाना जाता है। यह एक प्राकृतिक और स्वच्छ गुंडा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसे भीमकुंड नाम इसलिए दिया गया क्योंकि का निर्माण पांडव भाइयों में से एक भीम के द्वारा किया गया है।

इस पानी की स्वच्छता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि कुंड के नीचे तैरती मछली भी ऊपर से अत्यंत  रूप से दिखाई देती है। लोगों के बीच में एक रोचक तथ्य भी है कि यह कुंड इतना गहरा है कि इसकी गहराई आज तक किसी ने भी माफ नहीं पाए।

यहां तक कि कई पुरातत्व विभाग ने भी इसकी गहराई नापने कोशिश की, परंतु हर बार वह असफल हुए। पर्यटक यहां बड़ी संख्या में भीमकुंड पहुंचकर इसकी स्वच्छता और सुंदरता का आनंद लेते हैं।

बम्बर देवी मंदिर( bambar Devi mandir)

छतरपुर के लोडी क्षेत्र में स्थित या मंदिर स्थानीय निवासियों के सांसद पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह मंदिर देवी दुर्गा के एक अन्य स्वरूप बंबर का है| यह मंदिर पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है क्योंकि इस मंदिर की बनावट अत्यंत खूबसूरत है।

बम्बर देवी मंदिर को एक सिद्ध पीठ माना जाता है। प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के समय पर यहां पर एक भव्य मेले का भी आयोजन किया जाता है जहां पर देश-विदेश से भी लोग आते हैं।

पांडव गुफाएं एवं जलप्रपात(pandav caves and waterfall) 

छतरपुर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में यह गुफाएं और यह खूबसूरत जलप्रपात अत्यंत लोकप्रिय है। यह गुफा है और जलप्रपात पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित है या पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थान है? प्राचीन समय से ही कहा जाता है कि इन गुफाओ में पांडवों ने अपने निर्वासन के दौरान इस स्थान पर शरण की ली थी।

यह गुफाएं देखने में अत्यंत सुंदर हैं और यह गुफाओं का निर्माण प्राकृतिक रूप से हुआ है। इन गुफाओं के पास में एक खूबसूरत झरना है। उसके नीचे गहरी झील है जो चारों तरफ से प्राकृतिक हरियाली को समेटे हुए हैं। पर्यटकों के लिए छतरपुर में यह गुफाएं विशेष आकर्षण का केंद्र है।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान(panna national park)

यह राष्ट्रीय उद्यान भारत का कुल 22 वा बाघ अभ्यारण है। और मध्य प्रदेश में स्थित कितने भाग्य ब्रायन है, उनमें यह पांचवा है। इस योग्य उद्यान की लंबाई लगभग 543 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह पार्क जानवरों पंछियों और प्राकृतिक हरियाली से भरपूर है।

लाइफ एडवेंचर के शौकीन लोग यहां पर बहुत अधिक संख्या में आते हैं। पर्यटकों के लिए भी एक विशेष आकर्षण का केंद्र है। इस पार्क में विशेष रुप से जंगली बिल्ली हिरण बाग चिंकारा सांभर नीलगाय, मगरमच्छ घड़ियाल और पंछियों की लगभग ढाई सौ से भी अधिक प्रजातियां देखी जाती हैं।

इस नेशनल पार्क से खजुराहो की दूरी मात्र 55 किलोमीटर दूर है। इसी उद्यान में पांडव गुफाएं और एक खूबसूरत झील है। जो इस पन्ना राष्ट्रीय उद्यान का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी है। किसी भी लाइट एडवेंचर को भरपूर इंजॉय करने के लिए सफारी का होना बहुत जरूरी है।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में सफारी की सुविधा है। यहां पर सबसे अच्छी सफारी नाव् द्वारा होती है जो नजदीक में नदी बहती हुई नदी से की जाती है। नाव पर बैठकर जानवरों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखना अत्यंत रोमांचकारी होता है।

 इस पार्क की सफारी में सबसे खास बात यहां पर नाइट सवारी की भी सुविधा है जिसका समय शाम को 6:30 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक है और रात्रि 2:30 बजे से 5:30 बजे तक है।

पार्क में प्रवेश के लिए एंट्री फीस

इस पार्क में प्रवेश के लिए एंट्री फीस ₹40 निर्धारित की गई है और अगर आप जीप की सफारी का आनंद लेना चाहते हैं तो आधे दिन का चार्ज 1500 रुपए 

कैमरा ले जाने का चार्ज ₹40 

अगर वीडियोग्राफी करनी है तो ₹200

 गाइड चाहिए तो ₹100। 

प्राइवेट वाहन की एंट्री फीस ₹200 होती है।

 अगर आप वोट से लाइफ एडवेंचर सफारी का आनंद उठाना चाहते हैं तो डेड सो रुपए 

हाथी की सवारी का ₹400। 

और नाइट सफारी का चार्ज 1800 के लगभग है

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान घूमने से पहले सतर्क रहें। यहां पर चटक रंगों वाले कपड़े पहन कर ना जाए अन्यथा आपको मधुमक्खियां। पीछा नहीं छोड़ेंगे और आपको परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

पन्ना राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचे?(how to reach panna national park) 

खजुराहो से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने में केवल 57 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यहां पर बस द्वारा और टैक्सी द्वारा आप खजुराहो से आसानी से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान पहुंच सकते हैं।

वायु मार्ग द्वारा आपको खजुराहो से दिल्ली, मुंबई और बनारस के लिए रोज की फ्लाइट उपलब्ध है

रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन सतना जो कि 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे से अच्छी प्रकार से जुड़ा हुआ है। यहां आपको कई जगहों के लिए नियमित ट्रेनें मिल जाएंगी।

महामति प्राणनाथ जी मंदिर(mahamati prannath ji mandir)

यह मंदिर अत्यंत खूबसूरत और भव्य है| महामति प्राणनाथ जी का मंदिर छतरपुर पर्यटन के लिए भी विशेष महत्व रखता है। यह अद्भुत मंदिर पर्यटकों को नियमित तौर पर अपनी और आकर्षित करता रहता है इस मंदिर का निर्माण सन 1992 में किया गया था। इस मंदिर की शिल्पकारी हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य शैली से मिलती जुलती है।

केन घड़ियाल अभ्यारण(Ken ghariyal abhyarahan)

जलीय जीवो के प्रेमी के घड़ियाल अभ्यारण में जरूर आते हैं। यह अभ्यारण विशेषकर घर वालों के लिए संरक्षित किया गया है। यह वाइल्ड लाइफ सेंचुरी छतरपुर और रीवा जिले में स्थित है। यहां पर आकर पर्यटक। मगरमच्छ और घड़ियाल ओं की भारी संख्या देख सकते हैं जो कि यहां पर संरक्षण करके रखे गए हैं।

यह अभ्यारण अपने आप में एक विशिष्ट अभ्यारण है जहां पर केवल जलीय जीवो को ही संरक्षित किया जाता है। पन्ना में ही स्थितियां अभ्यारण बेहद खूबसूरत है और चारों तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है। इस अभ्यारण में केन नदी बहती है। इस नदी में ही घड़ियाल और मगरमच्छ को संरक्षित किया गया है

पर्यटन प्रेमी यहां पर आकर मगरमच्छ जानवरों के साथ खूबसूरत मोर और नीले बैल आदि को भी देख सकते हैं अगर आप इस अभ्यारण में आते हैं तो आप को बच्चों को जरूर लाना चाहिए।

इससे बच्चों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा और आप इस रोमांचक यात्रा का सुखद अनुभव भी कर सकते हैं। सेंचुरी सुबह प्रातः काल से लेकर शाम तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है।

बलदेव जी मंदिर(baldev ji mandir) 

बलदेव जी की काले शालिग्राम पत्थरों से निर्मित भव्य प्रतिमा देखने में अत्यंत सुंदर लगती है। बलदेव जी मंदिर में बड़े स्तंभों के साथ एक महामंडल नामक एक बड़ा हाल भी स्थित है। इस हाल को रोमन वास्तुकला से प्रेरित होकर डिजाइन किया गया है। और इस मंदिर की बनावट ऐसी है कि जिस के प्रमुख देवता के दर्शन आप मंदिर प्रांगण से बाहर से भी कर सकती है। इस मंदिर को छतरपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया है क्योंकि यह मंदिर देखने में काफी भव्य है और यहां पर्यटक काफी संख्या में इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं।

बेनी सागर बांध(beni Sagar bandh)

खजुराहो से। मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित या बेनी सागर बांध छतरपुर जिले का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है। वर्तमान समय में या पर्यटकों के बीच और स्थानीय निवासियों के लिए पिकनिक स्पॉट के रूप में प्रसिद्ध हो गया है।

गुलगंज किला(gulganj qila)

यह प्राचीन किला लगभग 2 मंजिला ऊंचा है और देखने में अत्यंत भव्य लगता है। इस प्राचीन किले का निर्माण कहा जाता है कि लगभग 18 18वीं शताब्दी के दौरान किया गया था। यह छतरपुर जिले का प्रमुख ऐतिहासिक केंद्र है और यह परिवर्तन को को अपनी तरफ आकर्षित करता रहता है।

छतरपुर के आकर्षक तालाब( chatarapur ke beautiful lake) 

आपको शायद ज्ञात होगा कि छतरपुर जिले को तालाबों का भी शहर कहा जाता है यहां के प्रमुख तालाबों में। प्रताप सागर, तालाब, किशोर, सागर, तालाब, ग्वाला, मगरा, तालाब, रानी, तलैया, सागर, तालाब आदि प्रमुख है जहां पर विशेष वोटिंग मछली पकड़ने का खेल आदि क्रियाएं होती हैं और यह पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

छतरपुर घूमने का सबसे अच्छा समय(best time to travel chatarpur) 

घूमने के लिए छतरपुर आने के सबसे अच्छा समय सर्दियों का माना जाता है क्योंकि यहां गर्मियों में गर्मी कुछ ज्यादा ही पड़ती है जिससे आपको यात्रा करने में असुविधा हो सकती है। अक्टूबर से लेकर मार्च तक का समय सबसे उपयुक्त होता है। यहां पर खजुराहो की यात्रा छतरपुर के तालाबों की यात्रा विशेष के लिए। पर्यटन के विशेष केंद्र हैं।

छतरपुर कैसे पहुंचे?(how to reach chatarpur)

ट्रेन से छतरपुर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन छतरपुर रेलवे स्टेशन है। जहां पर आपको छतरपुर रेलवे स्टेशन के लिए सीधी ट्रेन मिल जाएगी।

हवाई मार्ग से छतरपुर पहुंचने के लिए यहां का नजदीकी हवाई अड्डा  खजुराहो है जो छतरपुर से लगभग 44 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ससुराल एयरपोर्ट से आपको छतरपुर जाने के लिए कब लेने की आवश्यकता होगी?

सड़क मार्ग से छतरपुर आने के लिए  आपको छतरपुर सड़क मार्ग आसपास के सभी शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां पर आप प्राइवेट बसेज सरकारी बसें या निजी टैक्सी एनर्जी छात्रों से छतरपुर पर्यटन स्थल की यात्रा पर आ सकते हैं।

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