ताजमहल के बारे में कुछ अनोखी बाते और जानकारी (taj mahal ke baare mein kuch anokhi baate aur janakri)

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ताजमहल के बारे में एक नजर

निर्माणकर्ता         शाहजहां

रूपांकनकर्ता   उस्ताद अहमद लाहौरी

निर्माण तिथि        सन 1948 ईस्वी

स्थान                 आगरा

राज्य                 उत्तर प्रदेश

देश                    भारत

ताजमहल का निर्माण एवं इतिहास (History and construction of Taj Mahal in hindi)

दुनिया में सात अजूबों में से एक ताजमहल का निर्माण 1648 ईस्वी के आसपास हुआ था। ताजमहल को दुनिया का आठवां अजूबा भी कहा जाता है। ताजमहल का निर्माण करने का श्रेय शाहजहां को जाता है जिन्होंने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में इस भव्य इमारत का निर्माण कराया। ताजमहल के शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी जी को माना जाता है। ताजमहल फारसी तुर्की भारतीय इस्लामी वास्तुकला का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। सन 1983 ईस्वी में ताजमहल को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित किया गया।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जब भारत आए थे तो ताज महल को देखने के बाद उन्होंने कहा था”
आज मुझे अहसास हुआ इस दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं एक वो जिन्होंने ताज देखा है दूसरे वो जिन्होंने ताज नहीं देखा”।
होंगी इस दुनिया में एक से बढ़कर एक खूबसूरत इमारतें। लेकिन ताज जैसी कोई नहीं क्योंकि इसकी बुनियाद में एक बादशाह ने अपना दिल(love) रखा है।

हजारों टूरिस्ट जो ताज महल देखने आते हैं वो ये नहीं जानते कि जो वो सामने देख रहे हैं वो ताज महल का पिछला हिस्सा है। दरअसल जो शाही दरवाजा है वो नदी के किनारे दूसरी तरफ है। आज ज्यादातर टूरिस्ट ताज को वैसा नहीं देख पाते जैसा कि शाहजहां चाहते थे। मुगल काल में ताज तक पहुँचने के लिए नदी ही मुख्य रास्ता थी। ये एक तरह का हाईवे था।
बादशाह और उनके शाही मेहमान नाव में बैठकर आते थे। नदी के किनारे एक चबूतरा हुआ करता था। नदी बढ़ती गई और वह बहुत पहले ही नष्ट हो गया। बादशाह और उनके मेहमान उसी चबूतरे से ताज आया करते थे।

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ताजमहल का रहस्य क्या है?

दोस्तों ताजमहल कितना खूबसूरत है उतना ही इसके विषय में रोचक जानकारियां मिलती रहती हैं। ताजमहल के कई रहस्य हैं जिनके जवाब आज भी कोई पूरी तरह से नहीं दे पाया आइए जानते हैं कुछ इन्हीं प्रमुख रहस्यों के बारे में

ताजमहल के विषय में इतिहास में यही कहा जाता है कि ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में कराया था परंतु कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि ताजमहल शाहजहां और मुमताज की प्यार की निशानी नहीं है।

एक पुस्तक “द ट्रू स्टोरी ऑफ ताज महल” के अनुसार इस स्थान पर पहले एक विशाल शिव मंदिर हुआ करता था जिसे इतिहास में यहां रहने वाले राजपूतों द्वारा बनवाया गया था। इस पुस्तक में या कहा गया है कि युद्ध में राजपूतों के शाहजहां से हारे जाने के बाद शाहजहां ने इस मंदिर को तोड़कर ताजमहल का निर्माण कराया था। गौरतलब है कि इस रहस्य का वर्णन सिर्फ इस किताब में मिलता है जबकि सरकारी फाइलों में ऐसा कुछ भी तथ्य उपलब्ध नहीं है।

ताजमहल के रहस्यों में सबसे बड़ा रहस्य यही माना जाता है कि ताजमहल पहले एक विशाल शिव मंदिर था। इसके अलावा भारत सरकार ने ताजमहल पर किसी भी प्रकार के शोध पर रोक लगा रखी है। और इसके कई कमरों को पूरी तरह से सील कर दिया है प्रशासनिक अधिकारियों का यह कहना होता है कि इससे कौमी एकता पर फर्क पड़ सकता है और राष्ट्रीय स्तर पर दंगे हो सकते हैं। जबकि भारत सरकार ने भी “द ट्रू स्टोरी ऑफ ताज महल” पर प्रतिबंध लगा दिया है।

ताजमहल के प्रमुख रहस्य में ताज महल के अंदर पानी का स्त्रोत होना है। यह पानी का स्त्रोत कहां से आया अभी तक इस बारे में कोई भी पता नहीं कर पाया है। इस स्त्रोत के मुद्दे पर तर्क देते हुए कई इतिहासकारों ने यह बताया है कि यह शिव मंदिर हुआ करता था तब से यह स्त्रोत शिव मंदिर के ऊपर से निरंतर बूंदों के रूप में टपक रहा है।

ताजमहल के प्रमुख रहस्यों में यह भी कहा जाता है कि ताजमहल के निर्माण जितने कारीगरों ने किया था उन सब कारीगरों के हाथ शाहजहां ने कटवा दिए थे ताकि दोबारा इस तरह का ताजमहल ना बनाया जा सके। परंतु इस बात का भी सबूत उपलब्ध नहीं है जबकि इसके बारे में यह कहा जाता है कि इन सब कारीगरों से शाहजहां ने करारनामा करवाया था कि दोबारा इस तरह के ताज का निर्माण किस दुनिया में कहीं नहीं करेंगे। इसके लिए मोटी रकम करारनामा के लिए कारीगरों को दी गई थी ।

ताजमहल के प्रमुख रहस्यों में से यह भी माना जाता है कि ताजमहल चंद्रमा की रोशनी के साथ भी अपना रंग बदलता है। चांदनी रात में ताजमहल को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां पर आते हैं चांदनी रात में सफेद संगमरमर का ताज देखने में एकदम दूधिया चमचमाता हुआ रंग का हो जाता है जबकि अन्य दिनों में यह हल्का पीलापन लिए हुए दिखाई देता है।

ऐसा कैसे होता है इस बारे में भी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है परंतु इतिहासकारों का मानना है कि इसकी प्रमुख वजह ताजमहल के निर्माण में लगे हुए संगमरमर के पत्थर हैं जिन पर रोशनी के साथ प्रभाव पड़ता है और वह अपना रंग बदलते हैं।

ताजमहल के नीचे लकड़ी का होना: यह कहा जाता है कि ताजमहल के नीव पर पानी का प्रभाव ना पड़े इसके लिए ताजमहल के निर्माण करने से पहले इसके नीचे विशाल लकड़ियां रखी गई थी यह लकड़िया पानी में भी खराब नहीं हो सकती थी और मौसम में भी इनका प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है यह हजारों लाखों साल तक ऐसे ही सुरक्षित रह सकती हैं।

ताजमहल के प्रमुख रहस्य में इस बात की भी रहस्य यह है कि ताजमहल के नीचे लगभग 1000 कमरे बने हैं। ताजमहल ऊपर से जितना विशाल है उतना ही नीचे भी है यह कहना है कि ताजमहल के नीचे लगभग 1000 कमरे हैं जिसे शाहजहां के समय ही बंद करा दिया गया था यह कमरे आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए थे और इनमें जाने और निकलने का एक मार्ग बनाया गया था। कई प्रमुख इतिहासकारों ने भी ताजमहल के नीचे 1000 कमरे होने की पुष्टि की है।

ताजमहल की लंबाई चौड़ाई कितनी है?

ताजमहल की कुल लंबाई 896.1 मीटर और चौड़ाई 300. 84 मीटर है जबकि संपूर्ण संरक्षित स्थल की लंबाई 561.2 मीटर और चौड़ाई 300 दशमलव 84 मीटर की है।

ताजमहल के निर्माण में कितने रुपए लगे थे?

दुनिया के सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक ताजमहल के निर्माण में उस समय लगभग कंस्ट्रक्शन कास्ट 32 करोड़ रूपए के लगभग आंकी गई थी यह अपने आप में बहुत अधिक राशि थीं।

ताजमहल घूमने जाने के विषय में जरूरी टिप्स

  • ताजमहल हर शुक्रवार को पर्यटकों के लिए बंद रहता है।
  • ताजमहल में घूमने के लिए टिकट लेना पड़ता है यह टिकट सूर्यास्त से पहले और सूर्योदय से पहले टिकट खिड़की से बुक किए जा सकते हैं 
  • इसके अलावा आप ताजमहल की आधिकारिक वेबसाइट से भी टिकट बुकिंग करा सकते हैं।
  • ताज महल के अंदर ड्रोन कैमरा ले जाना पूर्णतया वर्जित है।
  • ताजमहल घूमने जा रहे हैं तो अपने साथ आधार कार्ड ले जाना ना भूलें।
  • टिकट पर दी जा रही गाइडलाइन के अनुसार ही ताजमहल में भ्रमण करें।
  • ताजमहल में अगर आप घूमना चाहते हैं तो ₹200 के नियमित टिकट के साथ-साथ आपको अतिरिक्त टिकट लेना पड़ेगा।
  • ताज महल के अंदर कैमरा ले जाने पर आपको अलग से टिकट लेना पड़ेगा।

ताजमहल टिकट दर

भारत के निवासी₹200 प्रति व्यक्ति

विदेशी नागरिक1100 रुपए प्रति व्यक्ति

आगरा का किला टिकट दर

भारत के निवासी प्रति व्यक्ति ₹50

विदेशी नागरिक प्रति व्यक्ति ₹650

अकबर का मकबरा टिकट दर

भारतीय निवासी ₹30 प्रति व्यक्ति

विदेशी नागरिक ₹310 प्रति व्यक्ति

फतेहपुर सिकरी का टिकट दर

भारतीय निवासी ₹50 प्रति व्यक्ति

विदेशी नागरिक ₹510 प्रति व्यक्ति

मेहताब बाग का टिकट दर

भारतीय निवासी ₹30 प्रति व्यक्ति

विदेशी नागरिक ₹300 प्रति व्यक्ति

रामबाग का टिकट दर

भारतीय निवासी ₹25 प्रति व्यक्ति

विदेशी नागरिक ₹300 प्रति व्यक्ति

मरियम का मकबरा टिकट दर

भारतीय नागरिक ₹25 प्रति व्यक्ति

विदेशी नागरिक ₹300 प्रति व्यक्ति

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ताजमहल आगरा कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग के द्वारा

अगर आप हवाई जहाज के द्वारा ताजमहल देखना चाहते हैं तो आगरा का निकटतम एयरपोर्ट खेरिया हवाई अड्डा है। जो प्रमुख शहरों से को हवाई मार्ग से जोड़ता है।

ट्रेन के द्वारा

आगरा स्टेशन सभी प्रमुख शहरों से अच्छी प्रकार ट्रेन नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।आप यहां सभी प्रमुख शहरों से आसानी से ट्रेन के द्वारा आ सकते हैं दिल्ली से आगरा को जोड़ने वाली प्रमुख ट्रेनों में पैलेस ऑन व्हील्स शताब्दी और राजधानी आदि ट्रेनें हैं।

बस के द्वारा

अगर आप आगरा में स्थित ताजमहल के साथ-साथ अन्य स्मारकों की सैर करना चाहते हैं तो हम आपको जानकारी दे दे कि आप बस या स्थानीय परिवहन के माध्यम से आसानी से घूम सकते हैं।यहां का सड़क परिवहन सभी प्रमुख शहरों से अच्छी प्रकार जुड़ा हुआ है।

ताजमहल के बारे में कुछ रोचक जानकारी (taj mahal ke bare mein important facts)


यह कहा जाता रहा है कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे लेकिन ये बात एक अफवाह जैसी लगती है क्योंकि इस बात का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है। बहुत से इतिहासकारों का मानना है कि शाहजहां ने मजदूरों और कारीगरों को जिन्दगी भर की पगार देकर उनसे करारनामा लिखवाया था कि वो ऐसी कोई दूसरी इमारत नहीं बनाएंगे।

ताज ताजमहल की जो चार मीनारें हैं ये बिल्कुल सीधी नहीं खड़ी हैं बल्कि चारों बाहर की ओर हल्की झुकी हुई हैं और इन्हें ऐसा ही बनाया गया था ताकि भूकंप जैसी आपदा आने पर अगर ये गिरे भी तो बाहर की ओर गिरे और मुख्य मकबरे को कोई नुकसान न पहुंचे।

कुतुब मीनार भारत की सबसे ऊँची मीनार है। लेकिन शायद आपको जानकर हैरानी हो ताज महल की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी ज्यादा है। ताज महल 73 मीटर ऊंचा है जबकि कुतुब मीनार की उंचाई 72.5 मीटर है।
दुनिया में जितनी भी इतिहासिक इमारतें मौजूद हैं उनमें से सबसे सुंदर कैलीग्राफी ताज पर हुई है।


जैसे ही आप ताज के बड़े दरवाजे से अंदर जाते हो दरवाजे पर लिखा ये सुलेख आपका स्वागत करता है।
हे आत्मा तू ईश्वर के पास विश्राम कर ईश्वर के पास शान्ति के साथ रहें और उसकी परम शांति तुझ पर बरसे।

यह कैलीग्राफी मुलुंड लिपी में है। इस कैलीग्राफी को डिजाइन करने वाले का नाम अब्दुल हक था जिसे इरान से बुलाया गया था। शाहजहां ने उसकी चकाचौंध कर देने वाली कला को देखते हुए उपाधि के तौर पर उसे अमानत खान नाम दिया।
जिस वक्त शाहजहां बादशाह बने वो मुगल सल्तनत का सबसे सुनहरा दौर था। या यूं कहें शाहजहां का जमाना मुगल हुकूमत के बसंत जैसा था। चारों तरफ अमन और खुशहाली थी। प्रजा के लिए बादशाह का हुकुम ही सबसे ऊंचा होता था। शाहजहां के बाद चाहत में लड़ाइयां नहीं होती थी वह जबरदस्त शानो शौकत ऐशो इशरत का दौर था। बादशाह को बड़ी बड़ी इमारतें बनवाने का शौक था। उन्होंने मुगल वास्तुकला के साथ भारत के प्राचीन इतिहास को मिला दिया था।

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ऐसी भव्य इमारत दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी थी। इसके लिए सफेद संगमरमर राजस्थान के मकराना से लाया गया था। फ़ेडरर क्रिस्टल चायना से मंगवाया गया था। लैब्स लाज ली अफगानिस्तान से आया था डर कोई स्थिति बद से जस पर पंजाब से सैफायर श्रीलंका से और कारनेशन अरब से आया था। कुल मिलाकर ऐसे ही 28 किस्म के बेशकीमती रत्नों को सफेद संगमरमर में जड़ा गया था। इन सब चीजों को विदेश से आगरा लाने के लिए एक हजार से भी ज्यादा हाथी इस्तेमाल किए गए थे।

ताज महल आज से करीब चार सौ साल पहले 1631 में बनना शुरू हुआ था और ये 22 साल बाद 1653 में पूरा हुआ। इसका निर्माण 20 हजार कारीगरों और मजदूरों ने किया था। वास्तु कला का इससे शानदार नमूना दुनिया में दूसरा कोई भी नहीं। ताजमहल के निर्माण के लिए हर चीज को हीरे की तरह परखकर चुना गया था।

ताज महल की दीवारों पर जो नक्काशी है इसकी तकनीक इटली के कारीगरों से सीखी गई थी। उज्बेकिस्तान के बुखारा से संगमरमर को तराशने वाले कारीगर बुलाए गए थे। इरान से संगमरमर पर कैलीग्राफी करने वाले कारीगर आए थे और पत्थर को तराशने के लिए बलूचिस्तान के कारीगरों को बुलाया गया था।


अठारह सौ सत्तावन की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने ताज को काफी नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने लैप्स लाज ली जैसे कई बेशकीमती रत्नों को ताज महल की दीवारों से खोद कर निकाल लिया था।
ताज महल के मुख्य गुम्बद का जो कलश है। किसी ज़माने में वह सोने का हुआ करता था। 19वीं सदी की शुरुआत में सोने के कलश को बदलकर कांसे का कलश लगा दिया गया।
दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि ताजमहल को किसने डिजाइन किया था लेकिन यह कहा जाता है कि 37 लोगों की एक टीम ने मिलकर ताजमहल का नक्शा तैयार किया था।


यह 37 वास्तुकार दुनिया के दूर दूर के कोनों से बुलाए गए थे।ताज महल की नींव बनाते समय ताज के चारों ओर बहुत से कुएं खोदे गए।इन कुओं में एक पत्थर के साथ साथ आप मनोज और महोगनी की लकड़ियों के लट्ठे डाले गए।
ये कुएं ताज की नींव को मजबूत बनाते हैं। आप न्यूजरूम होने की लकड़ियों में यह खासियत होती है कि इन्हें जितनी नमी मिलती रहेगी यह उतनी ही फौलादी और मजबूत रहेगी और इन लकड़ियों को नमी ताज के पास बहने वाली यमुना नदी के पानी से मिलती है। यमुना के पानी का स्तर हर साल घट रहा है और लकड़ियों में नमी की कमी आ गई है।
यही वजह है कि सन् 2010 में ताज में दरारें देखी गई।
1653 में जब ताज बनकर तैयार हुआ था उस समय इसके निर्माण की कीमत करोड़ों में आंकी गई थी। उसी हिसाब से अगर आज ताज बनवाया जाए तो इसे बनाने में कम से कम 57 अरब 60 करोड़ रुपये लगेंगे। उन्नीस सौ नवासी में एक भारतीय लेखक पी एन आयोग ने एक किताब लिखी थी जिसका नाम था ताज महल द ट्रू स्टोरी इस किताब में उन्होंने कई तर्कों के साथ यह दावा किया था कि ताज महल मकबरा बनने से पहले एक शिव मंदिर था और इसका नाम तेजो महालया था।


सन 2000 में पीएन अशोक ने अपनी बात को सिद्ध करने के लिए ताज की साइट खोदने के लिए सुप्रीम कोर्ट को अर्जी दी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मुताबिक ताजमहल कभी एक शिव मंदिर था। इस बात के कोई सुबूत नहीं हैं बल्कि शाहजहां ने ताज को बनवाया था। इसके प्रमाण ही इतिहास के पन्नों में मिलते हैं। एक कहानी पर सिद्ध है कि शाहजहां यमुना नदी के दूसरी तरफ काले संगमरमर से। ऐसा ही एक और काला ताजमहल बनाना चाहते थे।


कहा जाता है कि शाहजहां मुमताज की तरह अपने लिए भी एक मकबरा बनाना चाहते थे लेकिन इससे पहले कि वो काला ताजमहल बनवा पाएं। औरंगजेब ने उनको कैदखाने में डलवा दिया। लेकिन इतिहासकार कहते हैं कि ये बाद में बनाई गई मनगढंत कहानियां हैं। जिस जगह शाहजहां के काला ताज बनवाने की बात कही जाती है वहां कई बार खुदाई की जा चुकी है लेकिन ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला जिससे ये पता चले कि शाहजहां काला ताज बनवाना चाहते थे।

ताज महल का डिजाइन हुमायूं के मकबरे से प्रेरित दिखता है। हुमायूं शाहजहां के परदादा थे। उनका ये मकबरा हिंदुस्तान में आगे बनने वाले कई मुगल इमारतों के लिए प्रेरणा बना।दूसरे विश्वयुद्ध में सरकार ने मकबरे के चारों ओर बांस का घेरा बनाकर सुरक्षा कवच तैयार कराया था जिससे कि हवाई बमबाजी को भ्रमित किया जा सके और ये जर्मन और जापानी हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान कर पाएं।

कई देशों में ताजमहल की नकल पर बनी इमारतें मौजूद हैं जैसे चीन बांग्लादेश और कोलंबिया में और ऐसी एक इमारत भारत में भी मौजूद है। बीबी का मकबरा। ये इमारत महाराष्ट्र के औरंगाबाद में है। इसे मुगल बादशाह आजम शाह ने अपनी मां दिलराज बानो बेगम की याद में 17वीं सदी के आखिर में बनवाया था। इसे ताजमहल की तर्ज पर बनवाया गया था। इस मकबरे का गुम्बद ताजमहल के गुम्बद से छोटा है और इसका सिर्फ गुम्बद ही संगमरमर का है। बाकी निर्माण प्लास्टर से किया गया है।
ताजमहल की सबसे ज्यादा लोकप्रियता इसके निर्माण से जुडी अद्भुत प्रेम कहानी की वजह से है। बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में इस इमारत को बनवाया था। मुमताज का असली नाम आरजू मंद बानों बेगम था।
शाहजहां ने उन्हें मुमताज महल नाम दिया। यानी महल का सबसे अनमोल रातू।
महज 38 साल की उम्र में अपनी 14वीं संतान को जन्म देते वक्त मुमताज की मृत्यु हो गई। उस वक्त वो बुरहानपुर में थी। अपनी प्रिय बेगम की मृत्यु से बाचा बेहद दुखी हुए।
जैसी उनकी जिन्दगी ही तबाह हो गई और आखिर उनकी याद में शाहजहां ने ताज को बनवाने का फरमान जारी किया।पहले मुमताज को बुरहानपुर में ही दफनाया गया।
इसके बाद शाहजहां ने ताज को बनवाना शुरू किया। तब बुरहानपुर से मुमताज के शव को निकालकर जहां ताजमहल बन रहा था उसके पास एक बगीचे में दफनाया गया।ताज महल को तैयार होने में 22 साल लगे। तब तक मुमताज का शव बगीचे में बनाई गई कब्र में ही दफन रहा।बाद में उसे ताजमहल के अंदर मुख्य गुंबद के नीचे दफनाया गया।शाहजहां का सारा ध्यान ताज को एक खूबसूरत रूप देने में लगा रहा।
इसी बीच शाहजहां के ही बेटे औरंगजेब ने आगरा पर हमला कर अपने पिता को कैद कर लिया।शाहजहां से पूछा गया कि वह क्या चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि उनको ऐसी जगह पर कैदी बनाकर रखा जाए जहां से वो सीधे ताज को देख पाएं।और उनकी यह ख्वाहिश पूरी कर दी गई।कैद में रहते हुए भी शाहजहां हर वक्त ताज को देखते रहते और वहीं उन्होंने अपनी जिंदगी की आखरी सांस ली। मृत्यु के बाद उन्हें मुमताज के साथ ही ताजमहल में दफनाया गया।
एक हारे थके बादशाह को भी अगर किसी ने गिरने नहीं दिया तो वो मुमताज के लिए उनका बेपनाह प्यार ही था।

जिस लगन से प्यार की ये अनोखी निशानी बन कर तैयार हुई उसकी मिसाल आज पूरी दुनिया के सामने है।
कवि रविन्द्रनाथ टैगोर ने ताजमहल के बारे में लिखा है। वक्त के गाल पर एक आँसू हमेशा हमेशा के लिए।
उन्होंने ताज की छवि वक्त के गाल पर एक थामे हुए आँसू के रूप में बयान की है।
शाहजहां जानते थे कि ये दौलत ये ताकत और ये शानो शौकत एक दिन सब ख़त्म हो जाएगा।
उन्होंने सोचा की कुछ ऐसी यादगार चीज बनाई जाए जो हमेशा रहे और शाहजहां ने अपनी प्रिय की याद में ताज को बनवाया।
आज बाचा नहीं रहा। उनकी हुकूमत नहीं रही और उसकी सल्तनत को भी खत्म हुए कई जमाने गुजर गए।
बस एक ताज है जिसने बादशाह की सदियों पुरानी प्रेम कहानी को खुद में संजोये रखा है।
प्रकृति की गोद में चांद से जगमगाती ये भव्य इमारत सदियों से दो प्रेमियों के प्यार की अमर कहानी सुनाती आई है।
और सदियों तक सुनाती रहेगी।

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