माँ वैष्णो देवी की यात्रा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी maa vaishno devi ki yatra ke bare mein samporn jankari

मां वैष्णो देवी की पवित्र यात्रा के बारे में किसने नहीं सुना होगा।मां वैष्णो देवी की पवित्र गुफा जम्मू कश्मीर राज्य के कटरा जिले में स्थित स्थित है। समुद्र तल से लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह भव्य मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए भी जाना जाता है।

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1 श्री वैष्णो देवी माता की पवित्र गुफा
1.1 श्री वैष्णो देवी माता की कुछ प्रमुख कहानियां

यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र स्थलों में से एक है।मां शक्ति के स्वरूपों में से एक मां वैष्णो देवी की पिंडी रूप में स्थित यह गुफा भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र है। पहाड़ की ऊंची ऊंची चोटियों के मध्य स्थित यह पवित्र मंदिर हिंदू धर्म के सबसे बड़े आस्था केंद्रों में से एक है। इस पवित्र गुफा में मां शक्ति के तीन स्वरूप पिंडी रूप में विराजमान है।

मां वैष्णो देवी की पवित्र गुफा के संबंध में अनेक प्रकार की प्राचीन कहानियां प्रचलित हैं। भारत में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला यह मंदिर भारत ही नहीं पूरे विश्व में अत्यंत लोकप्रिय हैं। यहां पर भारत के साथ साथ विदेशों से भी श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस पवित्र स्थल की देखरेख का कार्य श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ मंडल नामक न्यास के द्वारा किया जाता है।

तो आइए दोस्तों जानते हैं पवित्र श्री वैष्णो देवी माता के गुफा, यात्रा, इतिहास, कहानियों के बारे में विस्तृत जानकारी….

श्री वैष्णो देवी माता की पवित्र गुफा

Vaishno Devi image
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श्री वैष्णो देवी माता की पवित्र गुफा की चढ़ाई लगभग 14 किलोमीटर की होती है। यह यात्रा कटरा से प्रारंभ होती है। पूरी रात चढ़ाई का सिलसिला चलता रहता है। माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा की यात्रा का प्रारंभ बाणगंगा चेकप्वाइंट से होता है। यहां पर आपको यात्रा पर्ची कटवानी पड़ती है जो निशुल्क होती है। यह यात्रा पर 6 घंटे तक मान्य होती है।इस यात्रा परची के बिना आप आगे की चढ़ाई नहीं कर सकते हैं।बाहर से आए हुए श्रद्धालु कटरा में ही विश्राम करके अपनी गुफा के मार्ग की चढ़ाई की तैयारी करते हैं।

श्री वैष्णो देवी माता की कुछ प्रमुख कहानियां

  • यह पवित्र गुफा अत्यंत प्राचीन है इसके विषय में कई प्रकार की रोचक कहानियां सुनाई जाती रही हैं प्रमुख कहानियों में से एक कहानी यह है कि माता वैष्णो देवी ने यहां के रत्नाकर सागर नामक व्यक्ति के घर जन्म लिया जिनका बचपन का नाम त्रिकुटा था। बाद में वैष्णव वंश के कारण इनका नाम वैष्णवी हो गया। बाल काल में ही इन्होंने अपने पिता से भगवान श्रीराम को आराध्य मानकर उनकी तपस्या करने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के पश्चात त्रिकुटा भगवान विष्णु की तपस्या करने लगी।सीता की खोज में निकले श्री रामचंद्र जी जब समुद्र किनारे पहुंचे तो उन्होंने त्रिकुटा को घोर तपस्या करते हुए देखा। और उनके समक्ष जाकर इस घोर तपस्या का रहस्य जानना चाहा। त्रिकुटा ने उन्हें बताया कि प्रभु श्री रामको उन्होंने अपना वर मान लिया है। परंतु श्रीराम ने उन्हें इस जन्म में सीता के प्रति कर्तव्य वान होने की बात बताई। और त्रिकुटा को आदेश दिया कि वह कटरा के नजदीक स्थित इस गुफा में जाकर तपस्या करें क्योंकि कलयुग में वह कल्कि के रूप में स्वयं प्रकट होकर उनसे विवाह करेंगे। श्री राम की आज्ञा मानकर त्रिकुटा इस स्थान पर आकर पिंडी रूप में अंतर्ध्यान हो गई। तब से इस स्थान पर उनकी पूजा अर्चना की जाने लगी।
  • इसके पश्चात एक अन्य कहानी में यह कहा जाता है कि यहां से लगभग 3 किलोमीटर दूर अनसुली गांव में श्रीधर नामक माता के भक्त रहते थे। प्रति दिन माता की पूजा अर्चना किया करते थे। एक दिन मैं स्वयं दिव्य रूप में प्रकट होकर श्रीधर को पवित्र भंडारा कराने का आदेश दिया। माता का आदेश मानकर श्रीधर सभी ब्राह्मणों को एकत्रित करने के लिए प्रयासरत हो गए। एक लालची और लोभी राक्षस भैरवनाथ को भी इस भंडारे का निमंत्रण मिला।

भैरवनाथ ने श्रीधर को उनकी हैसियत और उनकी दयनीय स्थिति के बारे में बताया जिसको सुनकर श्रीधर कुछ सशंकित हो गए परंतु माता के आदेश पर उनको विश्वास था माता ने उनको 307 ब्राह्मणों को एक कुटिया में भोजन कराने का आश्वासन दिया था।माता के आदेश पर श्रीधर में उस पवित्र भंडारे को पूर्ण कराया। और भंडारे में भैरवनाथ भी उपस्थित हुआ और देवी के इस चमत्कार को माना। शक्ति के अवतार की परीक्षा लेने के लिए वह माता का पीछा करने लगा। देवी का परीक्षा लेने के लिए भैरवनाथ 9 महीने तक माता का पीछा करता रहा। देवी ने अपने मां के प्रहार से पृथ्वी से एक धारा प्रवाहित की उस धारा में स्नान करने के पश्चात पर्वत श्रृंखला में जाकर ध्यान मग्न हो गई।

9 महीने तक पूजा आराधना करने से देवी को अनंत सिद्धियां प्राप्त हो गई।भैरवनाथ के द्वारा उनकी पूजा आराधना भंग करने के पश्चात पवित्र गुफा के द्वार पर आकर देवी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया।और अपने त्रिशूल के एक ही बार से भैरवनाथ का सिर धड़ से अलग कर दिया उनके प्रहार से भैरवनाथ का सिर उस स्थान से लगभग 2:30 किलोमीटर दूर जाकर गिरा। मृत्यु के समय भैरवनाथ ने देवी से क्षमा याचना की। देवी वैष्णो माता उसके मन की बात जानती थी कि भैरवनाथ उनसे अपनी मुक्ति के लिए युद्ध कर रहा था। देवी ने उसको उसके बुरे कर्मों से पाप मुक्त कर दिया और वरदान दिया कि जब भी कोई मां वैष्णो देवी की यात्रा पर आएगा तो बिना भैरव घाटी पर बने भैरव मंदिर के दर्शन किए उसकी यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाएगी। यह आदेश देकर देवी तीन पिंडों के रूप में वहां पर ध्यान मग्न हो गई।

 तब से यह स्थान माता वैष्णो देवी के पवित्र गुफा के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है भी है।

मां वैष्णो देवी की पवित्र यात्रा के रास्ते के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल

बाणगंगा

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बाणगंगा वह स्थान है जहां पर देवी ने अपने तीर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रहार करके एक पवित्र धारा प्रवाहित की उस धारा में स्नान करने के पश्चात देवी गुफा में जाकर ध्यान मग्न हो गई थी।इस पवित्र स्थान के बारे में यह कहा जाता है कि यहां इस धारा में जो भी व्यक्ति स्नान करता है अपने इस जन्म के सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

दर्शानी दरवाजा

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दर्शनी दरवाजा वह पवित्र स्थान है जहां पर मां वैष्णो देवी श्रीधर को बाल अवस्था में मिली थी। इस स्थान की एक खास बात यह है कि यहां से आप संपूर्ण त्रिकुटा पर्वत की मनमोहक दृश्य को इस स्थान से देख सकते हैं। वैष्णो देवी की पवित्र यात्रा का प्रारंभ स्थल भी यही है।

मां वैष्णो देवी की चरण पादुका

मां वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान बाणगंगा से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पौराणिक स्थल चरण पादुका के नाम से जाना जाता है। इस स्थान के बारे में यह कहा जाता है कि माता वैष्णो देवी भैरवनाथ से बचने के लिए जब जा रहे हैं तो इस स्थान पर रुक कर पीछे की तरफ देखने लगी जिसके परिणाम स्वरूप उनके चरणों के निशान इस स्थान पर उभर गए। आज के समय में यह स्थान पूजा का प्रमुख स्थान है यहां पर भक्त रुक कर देवी के भजनों,संगीत आदि से अपने आप को भक्तिमय कर लेते हैं।

अर्ध कुंवारी

अर्ध कुंवारी वह स्थान है जहां के बारे में मान्यता है कि इस स्थान पर देवी ने 9 महीनों तक तपस्या की थी भैरवनाथ के द्वारा ढूंढ लिए जाने के पश्चात स्थान पर देवी ने अपने त्रिशूल से पर्वत के अंदर से मार्ग बनाया जो कि वैष्णो देवी के नए महल तक जाता है। इस गुफा में कोख की आकार की आकृति बनी हुई है। इस गुफा में देवी ने 9 महीने तक तपस्या की थी इसलिए इसका नाम गर्भ जून गुफा भी हो गया।

हिमकोटी

हिमकोटी प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ क्षेत्र हैं। यूं तो इस स्थान का कोई खास ऐतिहासिक महत्व नहीं है। परंतु इसकी सुंदरता को देखकर इस मार्ग से जाने वाले श्रद्धालु इस स्थान पर रुक कर यहां की सुंदरता को देखने के लिए आकर्षित हो जाते हैं। इस स्थान पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने रेस्तरा भी स्थापित किया हुआ है।चारों तरफ मनमोहक और रोमांचक दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर होते हैं।

सांझी छत

साले छत समुद्र तल से लगभग 6200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान वैष्णो देवी के महल की यात्रा में सबसे ऊंचा स्थान है।यहां से नीचे की तरफ के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने पर मन पूरी तरह से प्रफुल्लित और शांत हो जाता है। सांझी छत में ही हेलीपैड बनाया गया है। यहां से वैष्णो देवी के महल के लिए आपको हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध होते हैं।

भैरव घाटी

भैरव घाटी वह प्रसिद्ध स्थान है जहां पर भैरवनाथ का सिर आकर गिरा था। इस स्थान का धार्मिक महत्व काफी अधिक है क्योंकि वैष्णो देवी की यात्रा बिना भैरव घाटी में बने भैरव मंदिर की के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है। इस स्थान के आसपास का दृश्य प्राकृतिक वातावरण और शांति प्रदान करने वाला है।

माता वैष्णो देवी का पवित्र भवन

Bhawan Vaishno Devi image
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माता वैष्णो देवी के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं का आखिरी पड़ाव यह पवित्र भवन है। यहां पर पिंडी ओं के रूप में माता विराजमान है। यह भवन अत्यंत सुंदर और ऊंची चोटी पर बना हुआ है। इस भवन परिसर में ही आपको श्रद्धालुओं के लिए बने हुए भोजनालय शयन कक्ष, सामान रखने के लिए क्लॉक रूम, मेडिकल सुविधाएं, पुलिस स्टेशन, जनरल स्टोर आदि कई चीजें उपलब्ध है। यह श्रद्धालुओं के माता वैष्णो देवी दर्शन का आखिरी पड़ाव होता है। माता वैष्णो देवी के दर्शन कर कर मनुष्य अपनी मन की मुरादे पूरी करने की माता वैष्णो देवी के आगे याचना करता है।और मान्यताओं के अनुसार माता वैष्णो देवी सबकी मुरादें पूरी करने वाली माता मानी जाती हैं।

माता वैष्णो देवी का जन्म कहां हुआ था?

माता वैष्णो देवी का जन्म त्रिकुटा पर्वत श्रंखला के समीप स्थित गांव में रत्नाकर जी के घर में हुआ था बचपन में इनका नाम त्रिकुटा था।फिर बाल अवस्था में उनका नाम बदलकर वैष्णवी हो गया जिन्हें हम वैष्णो माता के रूप में जानते हैं।

माता वैष्णो देवी की गुफा कहां स्थित है?

माता वैष्णो देवी की गुफा जम्मू कश्मीर राज्य के रियासी जिले में कटरा में स्थित है।

माता वैष्णो देवी का मंदिर कहां स्थित है?

माता वैष्णो देवी का मंदिर कटरा जम्मू कश्मीर राज्य में स्थित है।

वैष्णो देवी मैं क्या बर्फबारी होती है?

वैष्णो देवी मैं दिसंबर के आखिरी सप्ताह में अधिकतर बर्फबारी देखी गई है। परंतु जम्मू कश्मीर में कटरा से 15 किलोमीटर आगे से काफी अधिक मात्रा में बर्फबारी होती है।

वैष्णो देवी की पवित्र गुफा की चढ़ाई में कुल कितनी सीढ़ियां है?

वैष्णो देवी की पवित्र गुफा की चढ़ाई बहुत लंबी और उबर खाबर हैं फिर भी अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो यहां पर 3800 से लेकर 4300 के बीच में कुल सीढ़ियां है।वैष्णो देवी की पवित्र गुफा की चढ़ाई में कई जगह सीढ़ियों की जगह उबड़ खाबड़ रास्ते भी हैं।

माता वैष्णो देवी की यात्रा मे हेलीकॉप्टर का किराया क्या है?

दोस्तों अगर आप माता वैष्णो देवी की यात्रा हेलीकॉप्टर से करना चाहते हैं तो कटरा से सांझीछत तक आपको नियमित हेलीकॉप्टर सुविधा उपलब्ध है। हेलीकॉप्टर किराया प्रति व्यक्ति एक तरफ का ₹1045 है। हेलीकॉप्टर के टिकट की बुकिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से की जा सकती है।ऑफलाइन टिकट बुक करने के लिए आपके पास रजिस्ट्रेशन पर्ची का होना अति आवश्यक है।इसके साथ-साथ आपके पास आपका पहचान प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।ऑनलाइन टिकट बुकिंग करने के लिए आप माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर हेलीकॉप्टर की टिकट बुकिंग कर सकते हैं।

माता वैष्णो देवी कटरा जम्मू कश्मीर कैसे पहुंचे?

ट्रेन के द्वारा माता वैष्णो देवी कटरा कैसे पहुंचे?

दोस्तों अगर आप ट्रेन के माध्यम से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आना चाहते हैं तो यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन कटरा है कटरा से दिल्ली आदि अन्य प्रमुख शहरों के लिए नियमित ट्रेनें उपलब्ध है। गर्मियों के सीजन में यहां पर रेलवे बोर्ड के द्वारा कई प्रकार की विशेष रेलगाड़ियां चलाई जाती हैं।

बस के द्वारा माता वैष्णो देवी कटरा कैसे पहुंचे?

बस के द्वारा माता वैष्णो देवी का पवित्र मंदिर अगर आप भ्रमण करना चाहते हैं तो यहां की सड़कें नेशनल हाईवे एक से अच्छी प्रकार जुड़ी हैं। इसके साथ-साथ कटरा से अन्य प्रमुख शहरों की भी नियमित बसें चलती हैं।

हवाई जहाज के माध्यम से माता वैष्णो देवी कैसे पहुंचे?

दोस्तों अगर आप हवाई जहाज के माध्यम से कटरा वैष्णो देवी पहुंचना चाहते हैं तो यहां का निकटतम हवाई अड्डा जम्मू है। नई दिल्ली से जम्मू की हवाई जहाज से यात्रा करने में केवल 50 मिनट का समय लगता है।जम्मू हवाई अड्डे से नई दिल्ली के साथ-साथ मुंबई कोलकाता चेन्नई आदि प्रमुख शहरों की नियमित पुराने उपलब्ध होती हैं।

मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट कौन सी है?

www.maavaishnodevi.org

तो दोस्तों यह रहे माता श्री वैष्णो देवी की यात्रा के संबंध में संपूर्ण जानकारी। हमारा ये लेख पसंद आने पर अपने दोस्तों को शेयर करना ना भूले

 धन्यवाद

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