अयोध्या के प्रमुख पर्यटन केंद्र

अयोध्या नगरी विश्व प्रसिद्ध राजा श्री राम जी के जीवन से जुडी नगरी है| वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बनाने का निर्णय किया है| यहाँ श्री राम जी के भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा हालाकि ये नगरी विवादों में रही है परन्तु अब सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ मंदिर बनाने का आदेश जारी कर दिया  है| आइये जानते है अयोध्या के प्रमुख पर्यटन केन्द्रों के बारे में

हनुमान गढ़ी(hanuman garhi)

अयोध्या हिन्दू धर्म के लिए पवित्र नगरी है| यहाँ पर्यटन के लिहाज से काफी कई जगह है जहां पर्यटक जरुर जाना पसंद करते है|हनुमान गढ़ी क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि भगवान हनुमान अयोध्या की रक्षा के लिए यहां रहते है

धार्मिक लेख और बेसन के लड्डू बेचने वाली दुकानों के बीच में, आगंतुकों को मंदिर तक पहुँचने के लिए 70 से अधिक सीढ़ियों की दूरी तय करने  की आवश्यकता होती है।

गर्भगृह को रंग-बिरंगे स्तंभों, कोष्ठक और प्लास्टर के आकृतियों के साथ सजाया  गया है। मुख्य मंदिर में माता अंजनी और बाल हनुमान की एक मूर्ति है जिसमे माता अंजनी अपने पुत्र बाल हनुमान को अपनी गोद में लिए हुए है| यह मंदिर बहार से देखने में अत्यंत प्रिय लगता है| पर्यटक यहाँ श्री हनुमान के बाल रूप के दर्शन करने जरूर आते है|

श्री राम जन्म भूमि(ram janm bhumi) 

राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या के प्रमुख आकर्षक पर्यटन क्रेंद्रो  में से एक है। अयोध्या को  भगवान विष्णु के 7 वें अवतार भगवान राम का जन्मस्थान माना जाता है। भगवान राम के भक्तों के लिए इस स्थान का अत्यधिक महत्व है।

इस राम जन्म भूमि आकर्षण की एक झलक लेने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं| श्री राम जन्म भूमि को अब तो उत्तर प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र बनाने की इजाजत दी है| और वर्तमान में इस स्थान पर भव्य मंदिर बनाने का काम भी प्रारंभ हो गया है| यहाँ वर्ष भर साधू शन्तो का जमावड़ा लागा रहता है| श्री राम सनातन धर्म के श्रेष्ठ राजा माने जाते है|

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श्री राम जन्म भूमि को देखने के लिए देश विदेश से काफी मात्रा में पर्यटक आते है| विशेष रूपसे यहाँ श्री राम जन्मोत्सव को पूरा अयोध्या ही राम नाम की भक्ति में खो जाता है|

कनक भवन(kanak bhavan) 

ये भवन अयोध्या के सबसे सुंदर महलों में शुमार है| यहाँ पर वर्तमान समय में सीता राम जी की सोने के मुकुट वालीं मुर्तिया विराजमान है| यह महल आज भी देखने में भव्य दीखता है,जिसे देखने और श्री राम सीता जी के दर्शन को हमेशा भीड़ लगी रहती है|

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यह भवन के विषय में कहा जाता है की भगवान् श्री राम जी के विवाह के उपरान्त उनकी माता जी कौशल्या ने श्री राम जी की पत्नी सीता जी को मुह दिखाई के इनाम के रूप में इस भव्य महल को दिया था| इस स्थान की भव्यता और गर्भगृह में स्थापित देवता भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। एक मंदिर के बजाय एक विशाल महल के रूप में निर्मित, कनक भवन  भारत के बुंदेलखंड और राजस्थान क्षेत्र के शानदार महलों से मिलता जुलता है। मंदिर का इतिहास त्रेता युग से मान जाता  है।

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19 वीं शताब्दी के अंत में ओरछा और टीकमगढ़ के शाही घराने द्वारा एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था। एक विशाल आंगन में तीन तरफ मेहराबदार दरवाजों वाला एक ऊंचा छत वाला हॉल जिसमें चांदी की छतरी के नीचे भगवान राम और देवी सीता की सोने की मुकुट मूर्तियों के  हैं।

अन्य मंदिरों के विपरीत, कनक भवन की स्पष्ट रूप से बुंदेला प्रभावित वास्तुकला के हवादार, खुले स्थान शांत कोनों और आरामदायक वातावरण के लिए जाने जाते हैं।भगवान राम और देवी सीता की मूर्तियों को सोने के गहनों से सुशोभित किया गया है, जहाँ से मंदिर का नाम कनक ’है।

वर्तमान में इस मंदिर की देखरेख और प्रबंधन “श्री वृषण धर्म सेतु प्राइवेट” नामक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।इस  ट्रस्ट की स्थापना ओरछा और टीकमगढ़ के महाराजा साहेब श्री प्रताप सिंह जू देव ने की थी, जो इसके पहले अध्यक्ष भी थे।

मणि पर्वत(mani parvat)

मणि पर्वत का हिन्दू धर्म में ख़ास धार्मिक और पोराणिक महत्व है| मणि पर्वत के बारे में कहा जाता है की एक बार मेघनाथ के शक्ति बाण से घायल लछमन को बचाने के लिए हनुमान जी ने संजीवनी बूटी के लिए पूरे पर्वत को ही उठा लिया था| और हिमालय से लेकर समुद्र किनारे ले आये थे रास्ते में ही पर्वत का कुछ भाग अयोध्या में गिर गया जिसे आज मणि पर्वत कहा जाता है|

इस पर्वत के शिखर से पुरे अयोध्या नगरी को देखा जा सकता है| इसके अलावा इस पर्वत पर सम्राट अशोक के द्वारा निर्मित स्तूप और बौध मठ भी स्थित है| इस पर्वत की उंचाई लगभग ६५ फीट मानी जाती है| इस पर्वत को अयोध्या वासी पवित्र मानते है और इस पर्वत की विशेष रूप से पूजा भी की जाती है| पर्यटक यहाँ आकर इस पर्वत की सत्यता जरुर जानने की कोशिश करते है|

सीता रसोई(sita rasoi)

अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि के कुछ दुरी पर बना ये रसोई वास्तव में रसोई नही है ये एक मंदिर है जिसे सीता रसोई कहा जाता है| माना जाता है की सीता जी की ये रसोई है यहा सीता जी पकवान बनाया करती थी| इसी परिसर में ही राम लछमन भारत और शत्रुघ्न की मुर्तिया भी विराजमान है| ये मंदिर सीता रसोई के नाम से पहचाना जाता है|

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 त्रेता के ठाकुर टेम्पल 

त्रेता के ठाकुर मंदिर अयोध्या के सरयू नदी के किनारे नया घाट पर स्थित है। यह भगवान राम को समर्पित है, जिन्हें ‘त्रेता के ठाकुर’ के नाम से जाना जाता है। यह कहा जाता है कि यह मंदिर उस जगह पर बनाया गया है जहां भगवान राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था। आज से लगभग  300 साल पहले, कुल्लू राज्य के राजा ने यहां एक नया मंदिर बनवाया, जिसे ‘कालीराम का मंदिर’ के नाम से जाना जाता है।

1784 में, इंदौर की मराठा रानी, अहिल्याबाई होल्कर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इसमें राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, गुरु वशिष्ठ, हनुमान, सुग्रीव और उनके प्रधान द्वारपाल  – जय और विजया की मूर्तियाँ मौजूद  हैं, ये मुर्तिया  काले बलुआ पत्थर से बनी हुई  हैं और यह भी कहा जाता है कि यह सरयू नदी के पास बने हुए  मूल राम मंदिर से बरामद किए गए थे।

अक्टूबर के महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारहवें दिन) पर मंदिर वर्ष में केवल एक बार खुलता है। इस दिन को विशेष पूजा के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। देवताओं की पूजा करने के लिए भारी संख्या में भक्त मंदिर में आते हैं| कई विदेशी पर्यटक भी इस विशेष दिन यहाँ आकर प्रभु के दर्शन करते है|

भरत कुंड(bharat kund)

यह पवित्र भारत कुंड  फैजाबाद रेलवे स्टेशन से  15 KM दूर है।एसी कहानी है कि वह स्थल है जहाँ भगवान राम के भाई भरत ने वनवास से लौटने के लिए  (गहन साधना) की थी और भगवान राम की ओर से कौशल  के राज्य पर शासन किया था।

यह वर्तमान में एक शांत और स्वच्छ  जगह है जहां कुछ क्षण शांति से बिताने और ध्यान को अव्यवस्था से दूर रखने के लिए अत्यंत उपयुक्त  है। लोग यहां श्राद्ध समारोह (दिवंगत लोगों के लिए प्रार्थना) करने के लिए भी आते हैं और कुंड में डुबकी भी लगाते हैं। यह बुनियादी सुविधाओं के साथ गेस्टहाउस की सुविधा भी देता है।

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