बड़ा इमामबाड़ा जिसका निर्माण किसी आश्चर्य से कम नहीं (Bada imambada jiska nirmaan Kisi ashcharya se kam nhi in hindi)

बड़ा इमामबाड़ा(bada imambada) aashif ud daula के द्वारा बनवाया हुआ एक विशाल और बेहद खूबसूरत संरचना है जिसे आसाफाई इमामबाड़ा भी कहा जाता है। इस संरचना में गोथिक यूरोपियन प्रभाव के साथ-साथ राजपूत और मुगल कला का भी सम्मिश्रण दिखाई देता है। यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। बड़ा इमामबाड़ा जिसको भूल भुलैया भी कहा जाता है।

यहां पर ऐसी वास्तुकला है जिस से देखने पर वास्तुकार भी दंग रह जाए। बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक हैं। बड़े इमामबाड़े में स्थित भूल भुलैया तो पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी आश्चर्यचकित कर देती है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी लखनऊ में स्थित बड़ा इमामबाड़ा ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ-साथ एक खूबसूरत पर्यटन स्थल भी है।

यूं तो लखनऊ गोमती नदी के किनारे बसा हुआ एक खूबसूरत शहर है जिसे उत्तर प्रदेश की राजधानी कहा जाता है लखनऊ शहर अपने खूबसूरत उद्यानों, बगीचों, और अनोखी वास्तु कलात्मक इमारतों के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

लखनऊ को नवाबों का शहर भी कहते हैं। लखनऊ अपने विशिष्ट वेशभूषा आकर्षण तहजीब और उर्दू भाषा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बड़ा इमामबाड़ा आज भी भारत के साथ-साथ दुनिया के वास्तु कारों के लिए एक रहस्यमई इमारत है। तो आइए देर न करते हुए शुरू करते हैं बड़ा इमामबाड़ा के बारे में कुछ रोचक जानकारियां

बड़ा इमामबाड़ा फोटो
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बड़ा इमामबाड़ा का इतिहास ( history of bada imambada in hindi)

इस इमामबाड़े का निर्माण आसिफ उद दौला ने सन 1784 इसवी में अकाल राहत परियोजना के अंतर्गत करवाया था। बड़ा इमामबाड़ा को हालांकि भूल भुलैया के नाम से ख्याति प्राप्त है। इस विशाल इमामबाड़ा का गुंबदनुमा हाल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा है।

रोचक बात यह है कि उस जमाने में इसके निर्माण में कुल 8 से 10 लाख रुपए की लागत आई थी।और उस समय इमारत के बन जाने के बाद भी लखनऊ के नवाब इसकी 7 सज्जा के लिए ₹5 लाख तक खर्च कर देते थे।

बड़े इमामबाड़े का निर्माण कब हुआ?(bada imambada ka nirmaan kab hua in hindi)

बड़ा इमामबाड़ा को मरहूम हुसैन अली की शहादत की याद में बनाया गया है और इस विशाल इमामबाड़े का निर्माण 1784 इसवी में आसिफ- उद-दौला के द्वारा करवाया गया। इस इमारत की कल्पना और कारीगरी की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। बड़े इमामबाड़े में झरोखे इस प्रकार से बनाए गए हैं जहां से आप मुख्य प्रवेश द्वार से घुसते हुए किसी भी व्यक्ति को आसानी से देख सकते हैं जबकि वह आपको नहीं देख सकता।

front view of bada imambada image
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बड़ा इमामबाड़ा में घूमने की प्रमुख जगह( top places to visit in bada imambada in hindi)

बड़ा इमामबाड़ा में घूमने की प्रमुख जगह भूल भुलैया( bhul bhulaiya the top place to visit in bada imambada in hindi)

बड़ा इमामबाड़ा जिसको की भूलभुलैया भी कहा जाता है भूल भुलैया प्रमुख रूप से बड़े इमामबाड़े के दीवारों के बीच के स्थित गलियारे हैं।

यह कुल संख्या में 1000 से अधिक है और कई गलियारे आगे चलकर बंद हो जाते हैं। इन्हीं गलियारों को भूल भुलैया कहा जाता है। इसकी वास्तुकला बहुत ही आश्चर्यजनक है यहां पर अच्छे से अच्छा व्यक्ति भी रास्ता भटक जाता है इसलिए भूल भुलैया के लिए एक अच्छे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है जो कि हमें भटकने से बचाता है।

bada imambada image
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बड़ा इमामबाड़ा में घूमने की जगह शाही हमाम बावड़ी(Shahi Hamam Bawdi instead of roaming in Bada Imambara in hindi)

शाही हमाम बावड़ी एक प्रकार का कुआं है। जिसको 5 मंजिला बावड़ी माना जाता है। ऊपर से देखने पर सिर्फ हमें याद दो मंजिला ही दिखाई पड़ता है शेष तीन महिला पानी में डूबा रहता है उसका स्त्रोत गोमती नदी से माना गया है। यह यूनानी वास्तुकला का अद्भुत संगम है। इसको देखने पर पर्यटको की आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रहती।

बड़ा इमामबाड़ा में घूमने की जगह आसिफी मस्जिद(Asifi Masjid instead of roaming in Bada Imambara in hindi)

बड़ा इमामबाड़ा में एसपी मस्जिद एक विशाल मस्जिद है। इसके दोनों कोनों पर दो मीनारें स्थित है। परंतु यहां पर गैर मुस्लिमों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है।

भूल भुलैया/ बड़ा इमामबाड़ा क्यों बनवाया गया?

दोस्तों आसिफ उद दौला जो कि लखनऊ के नवाब थे उनकी जनता में भुखमरी की स्थिति आ गई जिसका निवारण करने के लिए उन्होंने खैरात में अनाज बांटने के बजाय काम करवा कर पैसे देने की सोची।

उन्होंने अपने आर्किटेक्ट किफायत उल्ला से मिलकर एक इमामबाड़े का निर्माण करने का निश्चय किया। जिससे कि लोगों को रोजगार मिल सके और उन्हें रोजी रोटी भी नसीब हो पाए। अवध के चौथे नवाब आसिफ उद दौला ने खैरात बांटने के बजाय इमामबाड़े का निर्माण कार्य शुरू कराया। लगातार काम चलता रहे इसके लिए वह लोगों से दिन में काम करवाते थे जबकि शाम को उसे गिरा देते थे। जिससे लोगों का काम चलता रहे इसी इसीलिए कहावत कहावत प्रसिद्ध हो गई कि जिसे ना दे मौला उसे दे आसिफ उद दौला

यह कहावत जब नवाब साहब ने सुना तो उन्होंने विनम्रता पूर्वक कहा जिसको ना दे मौला उसको क्या दे आसिफ उद दौला।

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बड़ा इमामबाड़ा के रोचक तथ्य( Interesting facts of Bada Imambara in hindi)
  • बड़ा इमामबाड़ा भूल भुलैया के नाम से भी जाना जाता है यह 1000 से भी ज्यादा छोटे-छोटे रास्तों का जाल है। जहां पर आकर अच्छे से अच्छा पर्यटक भी रास्ता भूल जाता है। इसकी कारीगरी और बनाने के तरीके को आज तक कोई भी वास्तुकार कॉपी नहीं कर पाया।
  • अगर आप भूल भुलैया में मेरे बाद तरीके से वापस आना चाहते हैं तो आपको एक अनुमोदित मार्गदर्शक की सहायता लेने की सलाह दी जाती है।
  • इमामबाड़े में एक और सुंदर संरचना है जिसे बावड़ी कहा जाता है यह पांच मंजिला सीढ़ीदार कुआं है। जो पूर्व में नवाबी युग की देन माना जाता है। या शाही हमाम नामक बावड़ी गोमती नदी से जुड़ी हुई है। पानी के ऊपर सिर्फ दो मंजिले ही दिखते हैं जबकि तीन मंजिले पानी के नीचे पूरे साल डूबे रहते हैं।
  • बड़ा इमामबाड़ा एक रोचक भवन है यह तो ना पूरी तरह से मस्जिद है और ना ही मकबरा है। कक्षों का निर्माण और दीवारों के उपयोग में सशक्त इस्लामी प्रभाव स्पष्ट रूप से झलकता है।
  • बड़े इमामबाड़े में कुल 3 विशाल कक्ष है और इनकी दीवारों के बीच छुपे हुए लंबे-लंबे गलियां रहे हैं जो लगभग 20 फीट मोटी हैं। याद घनी गहरी रचना ही भूल भुलैया कहलाती है।
  • बड़ा इमामबाड़ा की छत पर जाने के लिए 84 सीढ़ियां हैं जो ऐसे रास्तों से होकर जाती हैं जो किसी भी अनजान व्यक्ति को भ्रम में डाल दें ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति इस में भटक जाए और बाहर न निकल सके इसलिए इसे भूलभुलैया भी कहा जाता है।
  • बड़ा इमामबाड़ा के झरोखे से आप इसमें प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को देख सकते हैं जबकि वह व्यक्ति आपको बिल्कुल भी नहीं देख सकता है। ऐसा झरोखा किसी भी भवन में आज तक उपलब्ध नहीं है।
  • बड़े इमामबाड़े के छत पर पहुंचकर आप लखनऊ का संपूर्ण और सुंदर नजारा देख सकते हैं
  • बड़े इमामबाड़े में आसिफी मस्जिद भी है जहां पर गैर मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है मस्जिद परिसर के आंगन में दो ऊंची ऊंची मीनारे हैं।
  • बड़ा इमामबाड़ा के बारे में एक प्रसिद्ध कहावत है जो यहां पर बेहद प्रचलित है:”जिसे ना दे मौला उसे दे आसिफ उद दौला”
  • बड़ा इमामबाड़ा के आसपास के सुंदर बागान और प्राकृतिक हरियाली इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।
  • भूल भुलैया की बालकनी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है इसका प्रमुख कारण यह है कि इस बालकनी में अगर आप माचिस की तीली भी जलाएंगे तो बालकनी के दूसरे कोने तक आसानी से उसकी आवाज सुनाई पड़ती है। पर्यटक इस चीज को करके अत्यंत रोमांचित हो जाते हैं।
  • इमामबाड़े का भूल भुलैया के रास्ते तो कुछ इतने खतरनाक थे कि लोग इस में फस कर अपनी जान गवा चुके थे। यह माना जाता है कि भूल भुलैया भूमिगत सुरंगों का कैसा जाल है जो इमामबाड़े को दिल्ली कोलकाता और फैजाबाद से जोड़ता है जिसे अब लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बंद कर दिया गया है।
  • इमामबाड़े को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी मस्जिद का किताब प्राप्त है।
  • भूल भुलैया की दीवारों पर ऐसी संरचनाएं बनाई गई हैं और कई दिवाली ऐसी खोखली बनाई गई है कि आप एक कोने पर खड़े व्यक्ति की आवाज दूसरे छोर पर खड़े व्यक्ति को आसानी से सुनाई देता है। इसके बारे में कहा जाता है कि यहां की दीवारों के भी कान है।
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India, Uttar Pradesh, Lucknow, Bara Imambara and Asafi mosque image credit by
इमामबाड़ा किस पत्थर से बना हुआ है?

इमामबाड़ा किसी पत्थर से नहीं जबकि पूरी तरह से लखनवी ईटों से बना है। जी हां जानकर यह आपको आश्चर्य होगा कि इतना विशाल इमामबाड़ा किसी पत्थर का न बनकर विशेष रूप से लखनवी ईटों से बना हुआ है जो अपेक्षाकृत थोड़ी छोटी होती है।

बड़ा इमामबाड़ा भूल भुलैया कैसे पहुंचे?( how to reach bada imambada in hindi)

बड़ा इमामबाड़ा भूल भुलैया लखनऊ के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यह लखनऊ के मुख्य शहर में स्थित है इसलिए लखनऊ के चारों ओर से यहां पहुंचना बेहद आसान है फिर भी हम आपको जानकारी देते हैं कि आप विभिन्न परिवहन के साधनों से यहां कैसे पहुंच सकते हैं,?

सड़क परिवहन द्वारा भूलभुलैया कैसे पहुंचे?

भूल भुलैया अगर आप सड़क परिवहन के साधन से पूछना चाहते हैं तो यह चारबाग बस स्टैंड से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

ट्रेन परिवहन के द्वारा भूलभुलैया कैसे पहुंचे?

ट्रेन परिवहन के साधन से अगर आप भूल भुलैया पहुंचना चाहते हैं तो यार का निकटतम रेलवे स्टेशन चारबाग रेलवे स्टेशन है।

हवाई जहाज के परिवहन के द्वारा भूलभुलैया कैसे पहुंचे?

अगर आप हवाई परिवहन से भूल भुलैया पहुंचना चाहते हैं तो यहां का निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ हवाई अड्डा है हवाई अड्डे से भूल भुलैया की दूरी 35 किलोमीटर की है।

बड़ा इमामबाड़ा खुलने का समय क्या है ?

प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से शाम 6 बजे तक।

बड़ा इमामबाड़ा की एंट्री फीस क्या है ?

भारतीय लोगो के लिए 25 रूपये
विदेशी नागरिको के लिए 500 रूपये

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