चित्रकूट धाम के बारे में संपूर्ण जानकारी और चित्रकूट में घूमने की प्रमुख जगहें

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चित्रकूट धाम

चित्रकूट जिसे की भारत के सबसे पवित्र धामों में से एक माना जाता है। धार्मिक आस्था में विश्वास करने वाले लोगों के लिए और पर्यटकों के लिए यहां पर अनुकूल माहौल मिलता है। चित्रकूट धाम उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसा हुआ है। यह धाम विशेष तौर पर भगवान श्री रामचंद्र की वनवास यात्रा का गवाह माना जाता है यहां पर भगवान श्री राम ने 11 वर्ष 11 महीने और 11 दिन का समय व्यतीत किया था। घूमने-फिरने और हिंदू आस्था में विश्वास करने वाले शौकीन लोगों के लिए चित्रकूट धाम एक बेहद मशहूर जगह है। यहां पर कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जिनका की प्राचीन वेदों में वर्णन मिलता है। इस पवित्र स्थान पर घूमने के लिए ऐसी कई जगह है जहां पर पर्यटक घूम कर ईश्वर के करीब महसूस करता है आइए चित्रकूट धाम में घूमने के लायक प्रमुख जगहों के बारे में जानते हैं।

चित्रकूट धाम में घूमने की जगह कामतानाथ कामदगिरि पर्वत

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चित्रकूट धाम से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामतानाथ चित्रकूट धाम में सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कामतानाथ मंदिर चित्रकूट धाम के कामदगिरि पर्वत के नीचे स्थित है। कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा करने से सभी भक्तों के कष्ट समाप्त हो जाते हैं। ऐसी बातें कई सालों से चली आ रही हैं और कई ऐसे भक्त हैं जो कि इसका प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। कामतानाथ इस पर्वतराज को कहा जाता है ऐसा माना जाता है कि कामदगिरि की पूरी परिक्रमा करने वाला कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता यह परिक्रमा 5 किलोमीटर की होती है जिसे भक्त नंगे पांव पूरी करते हैं ‌।

कामतानाथ की परिक्रमा

कामतानाथ की परिक्रमा सभी भक्तों नंगे पांव 5 किलोमीटर पैदल चलकर पूरी करते हैं जो कि कामदगिरि पर्वत की पूरी एक चक्कर मानी जाती है। परिक्रमा की सबसे खास बात यह है कि आप परिक्रमा के दौरान आपको आसपास लगभग सभी तरह की दुकानें भक्तों का स्वागत करती हैं। इन दुकानों पर लेकर आपको खाने पीने से लेकर सजावट और महिला विशेष के भी दुकानें होती हैं।

लक्ष्मण झूला

कामदगिरि पर्वत श्रंखला के ठीक सामने स्थित लक्ष्मण पहाड़ी है जो कि कामतानाथ की परिक्रमा शुरू होने से 1 किलोमीटर बाद आती है। भक्त यहां पर पहुंचकर कामदगिरि पर्वत के और चारों तरफ चित्रकूट के नजारे को आसानी से देख सकते हैं। लक्ष्मण पहाड़ी पर स्थित मां मनसा देवी का मंदिर है जहां पर यह तथ्य है कि यहां पर जो भी सच्चे मन से मनोकामना मांगता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। इसके अलावा यह वही स्थान है जहां पर लक्ष्मण और भरत जी आपस में गले मिले थे।

लक्ष्मण झूला के लिए रोपवे

लक्ष्मण झूला का नाम यहां के प्रसिद्ध रोपवे की वजह से पड़ा इसे लक्ष्मण पहाड़ी भी कहा जाता है लक्ष्मण पहाड़ी पर पहुंचने के लिए प्रशासन द्वारा रोप वे की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भक्त अगर चाहे तो 450 सीढ़ियां चढ़कर लक्ष्मण पहाड़ी पहुंच सकते हैं और जो लोग इस में असमर्थ होते हैं वह रोपवे का सहारा लेकर आसानी से लक्ष्मण पहाड़ी पहुंच जाते हैं।

लक्ष्मण झूला का रोपवे शुल्क

लक्ष्मण झूला का रोपवे शुल्क ₹40 प्रति व्यक्ति पड़ता है जिसमें किया शुल्क आना और जाना दोनों तरफ का मिलाकर होता है।

आप हमारी वेबसाइट के माध्यम से चित्रकूट में होटल और चित्रकूट जाने के लिए फ्लाइट टिकट भी बुक कर सकते हैं। और वह भी सबसे कम दामों पर तो आज ही ट्राई करें।

चित्रकूट का मशहूर कांच का मंदिर

श्री रामभद्राचार्य जी के द्वारा और तुलसी पीठ सेवा न्यास के द्वारा यह कांच का मंदिर चित्रकूट के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक है। श्री रामभद्राचार्य जी जिन्हें की जगतगुरु की उपाधि प्राप्त है उनके सौजन्य से इस भव्य मंदिर की नींव रखी गई थी। इस मंदिर में भगवान श्री राम माता जानकी और भैया लक्ष्मण की सुंदर प्रतिमा स्थापित है। जबकि मंदिर के प्रांगण और मुख्य द्वार पर कांच की सुंदर नक्काशी की गई है। यह मंदिर देखने में बेहद भव्य दिखाई देता है अगर आप चित्रकूट धाम की यात्रा पर है तो मध्यप्रदेश के सतना में पढ़ने वाले इस भव्य मंदिर की सैर करना ना भूलें।

चित्रकूट का प्रसिद्ध जानकीकुंड

चित्रकूट में स्थित जानकीकुंड एक बेहद प्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक पर्यटन केंद्र है। जानकी कुंड के विषय में यह कहा जाता है कि यहां पर माता जानकी जिन्हें हम सीता माता के रूप में जानते हैं वह यहां पर स्नान किया करती थीं जिसे जानकीकुंड नाम दिया गया। यहां पर भक्तों के लिए पक्के घाट बने हुए हैं जहां पर भक्त माता सीता के चरण पादुका के दर्शन करने के पश्चात स्नान करते हैं। मंदाकिनी नदी में स्नान करने के बाद भक्त खुद को तरोताजा महसूस करते हैं यहां का दृश्य बेहद ही सुहावना और सुंदर होता है मंदाकिनी नदी के दूसरी तरफ आपको जंगल दिखाई देता है जहां का परिवेश बेहद ही सुंदर होता है। जानकी कुंड आसपास कई सुंदर मंदिर भी स्थित हैं जहां पर आप जाकर घूम सकते हैं।

चित्रकूट में प्रसिद्ध घूमने की जगह राम सिया मंदिर

चित्रकूट में घूमने लायक प्रमुख जगहों में राम सिया मंदिर भी हैं रामघाट से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर एक विशाल चट्टान के ऊपर बना हुआ है। विशाल चट्टान की मान्यता यह है कि इसी चट्टान पर बैठकर श्री राम माता सीता और लक्ष्मण आराम किया करते थे और उनके बगल में भगवान हनुमान भी बैठे हुए थे। आप इस पत्थर पर परिक्रमा करते हुए भगवान श्री राम और माता सीता के आकार का सही अनुमान लगा सकते हैं। सभी के प्रति चित्र इस पत्थर पर उतरे हुए हैं। जिन्हें देखकर भक्त भगवान श्री राम का प्रतिबिंब अपने मन में बना लेते हैं। इसके अलावा थोड़ी दूरी पर श्री कृष्ण मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर देखने में बेहद ही भव्य है। इस स्थान के आसपास बेहद ही शांति होती हैं। 

उत्तर प्रदेश में घूमने की प्रमुख जगहें

चित्रकूट धाम का प्रसिद्ध भरत मिलाप मंदिर

कामतानाथ की परिक्रमा मार्ग पर स्थित भरत मिलाप मंदिर बेहद ही पौराणिक मंदिर माना जाता है। संतों का कहना है कि यहीं पर भगवान श्री राम से भरत का मिलाप हुआ था। इसी स्थान पर भरत जी ने श्रीराम से वनवास समाप्त करके अयोध्या लौटने की विनती की थी।

कामतानाथ की परिक्रमा मार्ग पर यह मंदिर और मंदिर की मूर्तियां बेहद ही जीवंत है। इन खूबसूरत मूर्तियों को देख कर आपको ऐसा प्रतीत होगा कि हम मूर्तियां स्वयं ही बोल उठेंगे। इसके अलावा मंदिर के अंदर पिघली हुई चट्टान नजर आती हैं ऐसा तथ्य है कि भारत और श्री राम के मिलन के पश्चात यहां की चट्टाने पिघल गई थी। अगर आप कामतानाथ की परिक्रमा कर रहे हैं तो रास्ते में पड़ने वाले इस भव्य मंदिर को देखना ना भूलें।

चित्रकूट में घूमने लायक प्रसिद्ध जगह रामघाट

चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित रामघाट बेहद भव्य नजारा प्रस्तुत करता है। रामघाट को किस प्रकार से बनाया गया है कि पर्यटकों के लिए चित्रकूट में बेहद महत्वपूर्ण स्थान बन गया है। लोग रामघाट में ही आकर मंदाकिनी नदी में स्नान करने के पश्चात कामतानाथ की परिक्रमा के लिए जाते हैं। रामघाट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुंदर-सुंदर नाव की सवारी की व्यवस्था की गई है।इसके अलावा राम घाट के किनारे पर बने बाजार भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। रामघाट की तरफ ही आपको अनेक धर्मशाला और होटल मिलेंगे जोकि पर्यटकों के लिए रात्रि निवास का साधन बनते हैं।

रामघाट की आरती

नाम मंदाकिनी नदी और गंगा नदी की आरती राम घाट पर प्रतिदिन की जाती है। यह आरती शाम 7:00 बजे शुरू की जाती है और लगभग 1 घंटे के आसपास चलती है। इस आरती का साक्षी बनना ही सौभाग्य की बात मानी जाती है।

चित्रकूट धाम का प्रसिद्ध पवित्र स्थल हनुमान धारा

रामघाट से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हनुमान धारा एक बेहद शांत और खूबसूरत स्थल है। एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित हनुमान धारा भगवान हनुमान जी को समर्पित है। यहां पर लगभग 630 सीढ़ियों की चढ़ाई चढ़ने के पश्चात भगवान हनुमान जी के दर्शन होते हैं। इसके अलावा जो लोग सीढ़ी चढ़ने में असमर्थ होते हैं उनके लिए रोपवे की भी व्यवस्था की गई है।

पुरानी कहानियों के अनुसार यह वही स्थान है जहां पर लंका दहन करने के पश्चात श्री राम जी के आज्ञा के अनुसार हनुमानजी ने इसी धारा के नीचे आकर अपने शरीर की जलन को शांत किया था। इस मंदिर का विशेष महत्व दिया है कि यहां पर पर्वत की ऊंचाई पर एक गुप्त रूप से धारा गिरती हुई दिखाई देती है। यह धारा सीधे गिरती हुई नीचे हनुमान जी के मूर्ति के बगल में आती है। इस धारा के स्त्रोत के विषय में अभी तक कोई भी नहीं जान पाया कितनी ऊंचाई पर यह धारा कहां से गिरती है।

हनुमान धारा में रोपवे

हनुमान धारा में अगर आप 630 सीढ़ियों को नहीं कर सकते तो स्थानीय प्रशासन के द्वारा यहां पर रोपवे की व्यवस्था की गई है। इस रोपवे की यात्रा बेहद रोमांचकारी होती है।

हनुमान धारा में स्थित रोप वे का शुल्क

अगर आप रोपवे के द्वारा हनुमान धारा पहुंचना चाहते हैं तो यहां का आने जाने का शुल्क ₹120 प्रति व्यक्ति होता है। रुपए की यात्रा के दौरान बीच रास्ते में 30 सेकंड के लिए रोपवे को यात्रियों को बेहतरीन दृश्य दिखाने के लिए रोक दिया जाता है। रोपवे की ट्रॉली जब ऊंचाई पर पहुंचती है तो नीचे का नजारा बेहद ही विहंगाम होता है। कई लोग तो ऊंचाई देखकर डर भी जाते हैं।

चित्रकूट धाम का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर सीता रसोई

हनुमान धारा के ठीक ऊपर और पीछे की तरफ स्थित सीता रसोई वह स्थान है जहां पर माता सीता ने भगवान श्री राम और लक्ष्मण के लिए भोजन बनाया था। आज भी इस रसोई में रसोई की कई चीजें सहेज कर रखी गई हैं। आप जब हनुमान धारा के हनुमान जी के दर्शन करेंगे तो ठीक बगल से ऊपर की तरफ सीता रसोई बनी हुई है।

चित्रकूट धाम का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सती अनुसुइया मंदिर
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चित्रकूट धाम के प्रमुख स्टेशन से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर माता सती अनसुईया का भव्य मंदिर है। पहाड़ की ऊंची पर्वत श्रृंखला पर बना यह मंदिर पर्यटकों के लिए बेहद खास होता है इसके साथ यहां पर साधु संत भी काफी अधिक संख्या में माता सती अनसूया के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के ठीक सामने बहती हुई मंदाकिनी नदी और उसके बाद यहां के घने जंगल इस जगह को बेहद खास बनाते हैं। इस मंदिर के विषय में यह तथ्य है कि यहीं पर ब्रह्मा विष्णु महेश माता अनसूया की परीक्षा लेने के लिए बच्चों का रूप बनाकर आए थे जिन्हें माता सती अनुसूया ने मातृत्व देकर अपना बच्चा बना लिया था जिसके परिणाम स्वरूप ब्रह्मा विष्णु महेश की पत्नियां पार्वती जी लक्ष्मी जी और सरस्वती जी सती अनसूया के पास आकर तीनों देवों को छोड़ने की विनती करने लगी।

इसके अलावा किस जगह का महत्व कई पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। इसी जगह को मा मंदाकिनी नदी का उद्गम स्थल भी माना जाता है। इस मंदिर के आसपास भक्तों के लिए काफी अधिक संख्या में दुकाने स्थित हैं। इन दुकानों पर आकर भक्त और पर्यटक खरीदारी का आनंद ले सकते हैं।

सती अनसूया मंदिर कैसे पहुंचे?

सती अनसूया मंदिर अगर आप जाना चाहते हैं तो चित्रकूट धाम कर्वी से आप प्राइवेट टैक्सी ले सकते हैं जिसका कुल किराया ₹400 के आस पास होता है। इसके अलावा रामघाट से आपको सती अनसूया के साथ-साथ तीन और धामों की यात्रा के लिए टैक्सी ऑटो चलते हैं जिनका कुल किराया ₹100 ही होता है।

चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन से सती अनसूया मंदिर की दूरी लगभग 22 किलोमीटर की होती है।

चित्रकूट धाम में घूमने की प्रसिद्ध जगह गुप्त गोदावरी

चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर गुप्त गोदावरी स्थित है। गुप्त गोदावरी को छोटी गंगा भी कहा जाता है। गोदावरी नदी का उद्गम स्थल भी यही है। आपको यह प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोमांच का अनुभव कराता है। तीन तरफ से पर्वत दिखाई देते हैं इन पर्वतों के बीच में एक सुंदर तालाब बनाया गया है इस सुंदर तालाब के बगल से ही सीढ़ी जाती है ज्यूकी पर्वत के ऊंचाई पर एक गुफा मार्ग तक ले जाती है। जिसे की राम दरबार गुफा के नाम से जाना जाता है। संतों का कहना है कि भगवान श्री राम ने लक्ष्मण और सीता जी के साथ यहीं पर राम दरबार लगाया था। इस गुफा के ठीक बगल में ही गुप्त गोदावरी गुफा स्थित है। पहले गुफा से अंदर प्रवेश करने और बाहर आने का मार्ग एक ही होता है जो कि काफी सकरा है। दूसरी गुफा में प्रवेश करते समय ही आपको स्वयंभू शिवलिंग दिखाई देते हैं। यहां के पंडा आपसे दान की इच्छा जताते हैं। शिवलिंग के बगल से ही गुप्त गोदावरी गुफा का प्रवेश द्वार है आप गुफा में प्रवेश करते ही आपके घुटने तक पानी भर जाता है। इस बेहद सकरी गुफा में पहुंचकर आप रोमांच का अनुभव करने लगेंगे। यह गुफा लगभग 100 मीटर लंबी है। इस गुफा के विषय में यह कहा जाता है कि श्री रामचंद्र जी ने गुप्त गोदावरी नदी को यहीं पर प्रकट किया था जिससे कि माता सीता स्नान कर सकें।

इसके अलावा इस स्थान के बारे में ग्रंथों में और भी वर्णन देखने को मिलते हैं।

चित्रकूट धाम में घूमने की प्रमुख जगह राम दर्शन संग्रहालय

गुप्त गोदावरी मार्ग पर स्थित राम दर्शन संग्रहालय चित्रकूट के घूमने लायक प्रमुख जगहों में से एक है। भगवान श्री राम के समर्पित यह संग्रहालय एक मंदिर के समान माना जा सकता है। यहां पर आप तो संपूर्ण रामायण के विभिन्न घटनाक्रमों का सभी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा श्री राम के समय की कई प्रसिद्ध और धार्मिक चीजें भी इस संग्रहालय में रखी हुई हैं। यहां संग्रहालय धार्मिक आस्था में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास बन गया है। इसके अलावा इस संग्रहालय में कई देशों में दिखाए जाने वाले रामायण के कथनों को का विस्तार से वर्णन किया गया है। यहां पर आपको चाइनीज रामायण और वर्मा रामायण भी दिखाई जाती है। यह संग्रहालय बेहद शांत परिवेश में बनाया गया है।

राम दर्शन संग्रहालय का प्रवेश शुल्क

राम दर्शन संग्रहालय का प्रवेश शुल्क मात्र ₹10 है।

चित्रकूट धाम में प्रसिद्ध भरतकूप मंदिर

चित्रकूट से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भरतकूप मंदिर एक प्रकार का कुआं है। यह कुआं श्री राम के भाई भरत की वजह से पवित्र और प्रसिद्ध हो चुका है। ऐसी मान्यता है कि भारत को अपने भाई पर विश्वास था कि वह श्री राम को वापस अयोध्या ले जाएंगे। जिसके लिए उन्होंने पहले से सभी तीर्थ स्थलों का जल मंगा कर रखा था। परंतु श्री राम के नाम आने के कारण ऋषि अत्री के आग्रह पर उन्होंने सभी तीर्थों का जल इस कुएं में डाल दिया था। तब से ही कुआ बेहद पवित्र बन चुका है। इस कुएं में स्नान करने वाला व्यक्ति सभी रोगों से मुक्त हो जाता है। इस मंदिर के बाहर आपको कई प्रसाद और मिठाइयों की दुकानें दिख जाएंगी। भरतकूप मंदिर एक बेहद शांत जगह पर बना हुआ मंदिर है। भरतकूप के सामने ही चारों भाइयों का मंदिर भी है जिसमें भगवान श्री राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां विराजमान है।

चित्रकूट में प्रसिद्ध धार्मिक जगह स्फटिक शिला

चित्रकूट धाम में स्फटिक शिला भगवान श्री राम और माता सीता के आराम स्थल के रूप में जाना जाता है। गुप्त गोदावरी मार्ग में पड़ने वाला यह प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल कई घटनाक्रमों को अपने आप में समेटे हुए हैं। संतो के द्वारा यह कहा जाता है कि इसी इस फटिक शिला पर भगवान श्री राम माता सीता के साथ बैठकर मंदाकिनी नदी के विहंगम दृश्य को देखा करते थे। एक बार भगवान इंद्र का पुत्र जयंत ने माता सीता के पैरों पर कौवे का रूप धारण करके चोंच मार दी जिसके परिणाम स्वरूप माता सीता के पैरों से खून बहने लगा । यह देखकर श्री रामचंद्र जी को क्रोध आ गया। और उन्होंने तिनके का बाण बनाकर जयंत के ऊपर प्रहार कर दिया। जयंत जब तीनों लोकों में जाकर छूपने की कोशिश करने लगा परंतु वह अपने प्राणों को बचाने में असफल रहा अंत में उसने माता सीता के चरणों पर जाकर अपनी गलती की क्षमा याचना की तब से माता के आग्रह पर वह अपने प्राण बचाने में सफल हो गया। परंतु इस बाण के चोट के कारण कौवे की प्रजाति को आज भी एक आंख से कम दिखाई देता है ऐसा यहां के संतों का मानना है। 

चित्रकूट धाम में घूमने की जगह प्रमोद वन

चित्रकूट में घूमने वाली प्रमुख जगहों में प्रमोद वन प्रमुख है। प्रमोद वन अनेक प्रकार की प्राचीन कहानियों को अपने अंदर समेटे हुए हैं। प्रमोद वन के अंदर स्थित लक्ष्मीनारायण जी का भव्य मंदिर और उनके सामने कल्पवृक्ष दुनिया का एकमात्र वृक्ष है। कल्पवृक्ष को संतान प्राप्ति के लिए जाना जाता है। ऐसा तथ्य है कि प्रमोद वन में स्थित कल्पवृक्ष की जो भी सच्चे मन से परिक्रमा और पूजा करता है उसे संतान प्राप्ति अवश्य होती है। 400 वर्ष पुराना यह वृक्ष आज भी हरा-भरा और सुंदर दिखाई देता है।

इस वृक्ष के बारे में यह कहा जाता है कि रीवा स्टेट के राजा विश्व प्रताप सिंह एक संत से आशीर्वाद के रूप में इस वृक्ष को ले आए थे परंतु इस वृक्ष के बारे में यह कहा गया था कि यह जिस जगह भी पृथ्वी को स्पर्श करेगा उसी जगह स्थापित हो जाएगा। महाराजा पैदल ही इस वृक्ष को लेकर चल दिए रास्ते में चित्रकूट धाम पर विश्राम के समय यह वृक्ष धोखे से पृथ्वी को स्पर्श हो गया। और यहीं पर स्थापित हो गया लाख जतन करने के बाद भी यह कल्प वृक्ष टस का मस नहीं हुआ।

बाद में रीवा के राजा ने यहां पर लक्ष्मी नारायण जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करके इस वृक्ष की नींव भी रखी। रोचक बात यह रही कि मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान लक्ष्मी नारायण की मूर्ति में प्राण आ गए इस बात की पुष्टि वहां के सभी साधु संतों ने भी की।

अतर्रा कार्यालय : वृक्ष कबहु नहीं फल भखै, नदी न संचय नीर, परमार्थ के कारणै साधुन धरा शरीर

वर्तमान समय में कई ऐसी कहानियां आज भी प्रचलित है जिससे यह साबित होता है कि कल्पवृक्ष हर निसंतान दंपत्ति को संतान प्रदान करने की अटूट शक्ति रखता है। कामतानाथ की परिक्रमा करने के पश्चात भक्त कल्पवृक्ष के दर्शन और लक्ष्मी नारायण जी के दर्शन करना नहीं भूलता है।

चित्रकूट में घूमने की प्रमुख जगह गणेश बाग

दोस्तों अगर आप प्राचीन धरोहरों को देखने के शौकीन हैं तो आपको चित्रकूट में गणेश बाग जरूर जाना चाहिए। गणेश बाग में एक सुंदर मंदिर है और साथ में मिला खंडहर रूप में इमारत भी हैं।इस विशाल मंदिर और खंडार का निर्माण विनायक पेशवा राव ने अपनी ग्रीष्मकालीन वापसी के रूप में बनवाया था। पेशवा उस समय गर्मियों के दिनों में यहां पर घूमने के लिए आया करते थे। यह जगह बेहद शांत वातावरण में है और घूमने लायक जगह है। 

चित्रकूट में घूमने की अन्य जगहें

सतीश आश्रम

वाल्मीकि आश्रम

राम सिया गांव

मयूरध्वज आश्रम

विराज कुंड

सारभंगा आश्रम

सबरी वॉटरफॉल्स

चित्रकूट का स्थानीय व्यंजन

चित्रकूट में अगर आप घूमने जा रहा है तो हम आपको जानकारी दे दे कि आपको यहां पर स्थानीय व्यंजनों में शुद्ध शाकाहारी व्यंजन ही परोसा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र जगह पर आप शाकाहारी व्यंजनों का आनंद उठा सकते हैं। चित्रकूट में घूमते घूमते आप यहां के स्ट्रीट फूड्स का भी आनंद ले सकते हैं। यहां के शाकाहारी भोजन में चाइनीस शाकाहारी फ़ूड और शुद्ध देसी व्यंजन ही आपको मिलेंगे।

चित्रकूट में कहां रुके?

अगर आप चित्रकूट में रुकने के लिए होटल्स की तलाश में है तो आप हमारी वेबसाइट पर जाकर सर्च कर सकते हैं। चित्रकूट में आपको रुकने के लिए लो बजट से लेकर आए बजट तक के होटल आसानी से उपलब्ध होते हैं। इन होटलों का किराया ₹500 प्रति व्यक्ति से लेकर ₹3000 प्रति व्यक्ति तक होता है। होटल्स के अलावा आप यहां पर धर्मशाला में भी रुक सकते हैं।

चित्रकूट कैसे जाएं?

चित्रकूट का निकटतम हवाई अड्डा

इलाहाबाद एयरपोर्ट

चित्रकूट का निकटतम रेलवे स्टेशन

चित्रकूट कर्वी

चित्रकूट का निकटतम बस स्टैंड

चित्रकूट बस स्टैंड

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चित्रकूट में रुकने के लिए धर्मशाला

चित्रकूट में अगर आप रुकना चाहते हैं तो यहां पर रामघाट से लेकर कामतानाथ मंदिर तक कई धर्मशालाएं स्थित हैं। इन धर्मशाला में यात्री निवास की सुविधा उपलब्ध होती है और बेहद ही सुविधाजनक शुल्क लिया जाता है।

चित्रकूट धाम क्यों प्रसिद्ध है

चित्रकूट धाम प्रसिद्ध तौर पर भगवान श्री राम के वनवास यात्रा के दौरान यहां बिताए गए समय के कारण प्रसिद्ध है। भगवान श्री राम ने माता जानकी और भाई लक्ष्मण के साथ यहां पर 14 वर्ष के वनवास काल का एक 11 साल 11 महीने और 11 दिन का समय यहीं पर बिताया था। इस घटनाक्रम के अलावा यहां पर माता सती अनसूया का आश्रम भी स्थित है। माता सती अनसूया को ब्रह्मा विष्णु महेश की माता के रूप में भी ख्याति प्राप्त है।

चित्रकूट धाम में घूमने की जगह कौन-कौन सी है

चित्रकूट धाम में घूमने के लिहाज से बहुत सारी ऐसी जगह है जहां पर आप घूम सकते हैं इन जगहों में प्रमुख रूप से रामघाट,हनुमान धारा, कांच मंदिर , कामदगिरि पर्वत, कामतानाथ परिक्रमा, भरत मिलाप मंदिर, भरतकूप, जानकी कुंड ,श्री राम दर्शन, स्फटिक शिला, माता सती अनसूया आश्रम, मंदाकिनी नदी, चित्रकूट के जंगल , गुप्त गोदावरी गुफा, श्री राम दरबार, कल्पवृक्ष आदि जगहों पर घूम सकते हैं।

चित्रकूट से मैहर की दूरी कितनी है?

चित्रकूट धाम से मैहर की दूरी 120 किलोमीटर की होती है अगर आप चित्रकूट धाम की यात्रा कर चुके हैं और मेहर की भी यात्रा करना चाहते हैं तो चित्रकूट बस स्टैंड से नियमित तौर पर मेहर के लिए प्राइवेट और सरकारी बसें चलती हैं।

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