कामतानाथ मंदिर जिसे कामदगिरि भी कहा जाता है यहां पर पर्वत की परिक्रमा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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कामतानाथ मंदिर (कामदगिरि पर्वत) चित्रकूट

चित्रकूट धाम को सभी सभी धामों में प्रमुखता से माना गया है। चित्रकूट वही स्थान है जहां पर भगवान श्री रामचंद्र जी ने अपने वनवास काल के 11 साल 11 महीने और 11 दिन यहीं पर बिताए थे। वैसे देखा जाए तो चित्रकूट की पावन धरा पर और कुछ दूरी पर एक पवित्र स्थान है जहां का इतिहास आज भी लोगों के बीच जीवंत है। एक ऐसा ही स्थान है जिसे हम कामदगिरि पर्वत या कामतानाथ मंदिर के नाम से जानते हैं। आइए जानते हैं कामतानाथ मंदिर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी: 

कामतानाथ मंदिर का इतिहास

कामतानाथ मंदिर का इतिहास बेहद पुराना है। इस मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर श्री राम जी के वनवास काल के दौरान स्थापित किया गया है। प्रमुख तौर पर जब श्री रामचंद्र जी अपने वनवास काल के दौरान यहां पर रुके थे तभी से इस मंदिर की ख्याति प्राप्त हुई।

(Photo by Akshay Gupta/Pacific Press/LightRocket via Getty Images)

कामदगिरि पर्वत में स्थित है कामतानाथ मंदिर

कामदगिरि पर्वत के चारों दिशाओं पर कामतानाथ के चार मंदिर बने हुए हैं।जिन्हें कामतानाथ मंदिर के रूप में जाना जाता है। कामदगिरि पर्वत चित्रकूट पर्वत भी कहा जाता है। कामदगिरि पर्वत तो आप जिस दिशा से भी देखेंगे तो आपको यह धनुष के आकार का दिखाई देगा इस पर्वत की यह खास बात सबसे ज्यादा प्रचलित है।

कामतानाथ मंदिर की परिक्रमा

यहां पर अमावस्या के दिन विशेष तौर पर लाखों की संख्या में भक्तों कामतानाथ की परिक्रमा करने के लिए इकट्ठा होते हैं। पास में ही स्थित रामघाट की मंदाकिनी नदी में स्नान करने के पश्चात 5 किलोमीटर की नंगे पांव की परिक्रमा शुरू की जाती है। 5 किलोमीटर की परिक्रमा करने के पश्चात भक्तों को या परम विश्वास हो जाता है कि वह अपने कष्टों से मुक्त हो जाएंगे।

कामतानाथ की कहानी

कामदगिरि पर्वत के कामतानाथ की कहानी लिया कहीं जाती है कि जब भगवान श्री राम यहां से जाने लगे थे तब कामदगिरि पर्वत निराश हो गए थे और उन्होंने भगवान श्रीराम से यह कहा था कि जब आप यहां से चले जाएंगे तो इस जगह को कौन पहचाने गा। भगवान श्री रामचंद्र जी ने कामदगिरि पर्वत को इच्छापूर्ति पर्वत का वरदान दिया और यह कहा कि जो भी आप की परिक्रमा करेगा उसके सभी कष्ट दूर होंगे और मैं भी उस भक्त के करीब रहूंगा। तब से कामतानाथ की परिक्रमा आज तक निरंतर चल रही है। आपको चित्रकूट ही नहीं भारत के कोने कोने में कई ऐसे लोग मिल जाएंगे जो कि कामतानाथ की परिक्रमा के विषय में अच्छी तरह जानते होंगे। तभी से यह मंदिर कामतानाथ मंदिर के रूप में विख्यात हो गया। 

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कामतानाथ परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले कई प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर

कामतानाथ की परिक्रमा स्थल पर ही आपको कई ऐसे प्राचीन मंदिर देखेंगे जहां पर जाने से आपको यहां की प्राची नेता का अनुभव हो जाएगा। यह मंदिर बेहद प्राचीन है मंदिरों में प्रमुख तौर पर भरत मिलाप मंदिर और लक्ष्मण पहाड़ी और वाल्मीकि आश्रम आदि हैं। 

कामतानाथ मंदिर के आस-पास

कामतानाथ मंदिर के आसपास आपको पूजन सामग्री की सैकड़ों की संख्या में दुकानें मिल जाएंगी। इसके अलावा परिक्रमा स्थल पर ही आपको पूजन सामग्री की दुकान है इसके अलावा महिला विशेष की सजावटी दुकाने, लकड़ी के बने हुए खिलौनों की दुकान कामतानाथ मंदिर के आसपास दिखाई देती हैं। कामतानाथ मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर कई प्राचीन मंदिर और श्री रामचंद्र जी के स्मारक के रूप में अवशेष दिखाई देंगे।

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कामतानाथ मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

सब लोग मन में सवाल उठता है कि कामतानाथ मंदिर इतना क्यों प्रसिद्ध है इसका प्रमुख उत्तर यह है कि यह मंदिर भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करने वाला माना जाता है। और आपको लाखों ऐसे भक्त मिल जाएंगे जो कि इस बात से सहमत है कि यहां आने के पश्चात उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं। इसके साथ-साथ भगवान श्री रामचंद्र जी के वनवास काल के समय का मंदिर होने के कारण कामतानाथ मंदिर प्रसिद्ध है। 

कामतानाथ मंदिर खुलने का समय

कामतानाथ मंदिर भक्तों के लिए प्रातः 5:00 बजे ही खोल दिया जाता है और यह रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

कामतानाथ भगवान कौन थे?

कामतानाथ भगवान प्रमुखता से कामदगिरि पर्वत को ही कहा जाता है। इस पर्वत के आसपास भगवान श्री राम माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण के साथ अपने वनवास काल के 11 साल के अधिक समय तक यहां पर रहे थे। जब भगवान श्री राम वनवास काल के दौरान चित्रकूट से जाने लगे तब कामतानाथ पर्वत में निराश होकर उनसे प्रश्न किया कि आपके जाने के बाद चित्रकूट को कौन पूछेगा। इसके पश्चात भगवान श्री रामचंद्र जी ने कामदगिरि पर्वत को यह आशीर्वाद दिया की आपकी जो भी परिक्रमा करेगा उसे उसकी संपूर्ण मनोकामना की पूर्ति होगी। कामदगिरि पर्वत को ही कामतानाथ भगवान कहा जाता है।

कामतानाथ परिक्रमा की दूरी

कामतानाथ परिक्रमा की कुल दूरी 5 किलोमीटर की होती है। जो प्रमुख तौर पर कामदगिरि पर्वत का पूरा एक चक्कर होता है।

चित्रकूट क्यों प्रसिद्ध है?

चित्रकूट अपने सुंदर प्राकृतिक दृश्य और आध्यात्मिक महत्व के लिए भारत ही नहीं दुनिया में प्रसिद्ध है। चित्रकूट का वातावरण बेहद शांत और सुंदर होता है। यहां पर आपको कई हरे-भरे पहाड़ भी दिखाई देते हैं इसके अलावा चित्रकूट में कई बड़े साधु संत हुए जिन्होंने अपनी आध्यात्मिकता को उच्च स्तर पर ले गए। चित्रकूट में ही कई बड़े ऋषि-मुनियों का आश्रम भी था इनमें प्रमुख रूप से सती अनसूया का आश्रम भी है जिन्हें त्रिदेव को बाल रूप में खिलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। 

कामतानाथ मंदिर कैसे पहुंचे?

कामतानाथ मंदिर अगर आप पहुंचना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले रामघाट पहुंचना होगा। रामघाट से ही आपको कामतानाथ मंदिर के टेंपो और ऑटो आसानी से मिल जाएंगे।

कामतानाथ मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन चित्रकूट धाम कर्वी है जोकि कामतानाथ से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर है।

कामतानाथ मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो एयरपोर्ट है जो कि यहां से लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर है।

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